आईजीआरएस पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में अफसर लापरवाही बरत रहे हैं। निस्तारण के फीडबैक पर खुलासा हुआ कि एक तिहाई मामलों में बिना शिकायतकर्ता से बात किए ही फर्जी रिपोर्ट लगा दी गई। सबसे अधिक लापरवाही एसडीएम चायल के स्तर पर की गई है। डीएम मधुसूदन हुल्गी ने नाराजगी जाहिर करते हुए ऐसे 16 अफसरों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
डीएम के निर्देश पर जनपद में आईजीआरएस सेल के 11 अप्रैल से 22 अप्रैल के बीच निस्तारित 95 मामलों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिया गया। इनमें से 35 शिकायतकर्ताओं ने निस्तारण पर असंतोष जाहिर किया है। सर्वाधिक 10 मामले एसडीएम चायल के रहे। वहीं, एसडीएम सिराथू के सात व एसडीएम मंझनपुर के एक मामले रहे।
इसके अलावा जिला समाज कल्याण अधिकारी, खान निरीक्षक, एसडीओ चायल, बीडीओ चायल, मंझनपुर, भरवारी और दारानगर-कड़ाधाम के ईओ, सीओ चायल, थानाध्यक्ष चरवा और मंझनपुर के एक मामले शामिल रहे। वहीं, डीपीआरओ के तीन और बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी व सीएमओ से जुड़े दो मामलों के निस्तारण से शिकायतकर्ता असंतुष्ट मिले।
डीएम ने संबंधित अफसरों से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना स्पॉट मेमो के आईजीआरएस का निस्तारण नहीं करने का निर्देश दिया है।