म्योहर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत की कल्पना पर विकास विभाग के अफसर पानी फेर रहें हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण म्योहर गांव से लिया जा सकता है। 12 हजार की आबादी वाले गांव की साफ-सफाई का जिम्मा सिर्फ एक सफाई कर्मी के भरोसे छोड़ा गया है।
कौशाम्बी विकास खंड के म्योहर गांव से जुड़े सात मजरे हैं। यहां की आबादी 12 हजार है। सड़क के किनारे गांव बसा होने के कारण यहां बाजार भी लगती है। यहां पर प्रथामिक अस्पताल भी है। इसके अलावा एक कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, 11 परिषदीय स्कूल, 11 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इसके बाद भी इस गांव की साफ-सफाई विकास विभाग के अफसरों ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है। गांव में महज एक सफाई कर्मी को तैनात किया गया है। जो इतनी बड़ी आबादी वाले गांव में साफ-सफाई पूरा नहीं कर पाता। इससे गांव की नालियां चोक हो चुकी हैं।
नालियों का गंदा पानी सड़क पर फैलता रहता है। लोगों को मजबूरी में इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। गांव के रवि जायसवाल, प्रीतम तिवारी, लवकुश आदि का कहना है कि चार साल पहले इस गांव में चार सफाई कर्मी पोस्ट थे। इसके कारण यहां साफ-सफाई की दिक्कत नहीं होने पाती थी। विकास विभाग के अफसरों ने तीन सफाई कर्मियों का तबादला दूसरे स्थान पर कर दिया। जिसके चलते समस्या आ रही है। जो सफाई कर्मी पोस्ट भी है, वह व्यवस्था पर नाकाफी साबित हो रहा है।