स्वास्थ्य विभाग ने ब्लॉक क्षेत्र में छह सरकारी अस्पताल खोल रखे हैं। इनमें 10 बेड की ब्लॉक स्तरीय एक पीएचसी मूरतगंज में है, जहां चार एमबीबीएस चिकित्सक हैं। इसके अलावा भरवारी, लोहरा, अमनीलोकीपुर और गौसपुर में न्यू पीएचसी है। इनमें दो जगह एमबीबीएस और दो जगह आयुर्वेद चिकित्सक हैं।
इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य प्रसव के अलावा सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार समेत प्राथमिक उपचार की ही व्यवस्था है। उच्च स्तर की सुविधाओं के लिए वर्ष 2011 में 30 बेड के सीएचसी आलमचंद्र की स्थापना हुई थी। लेकिन, विशेषज्ञ चिकित्सक व संसाधन नहीं मिले। इसके कारण इस अस्पताल की सुविधाएं पीएचसी से भी बदतर हो गईं हैं।
इसका अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि पीएचसी मूरतगंज में रोज 200 से 250 मरीज आते हैं तो सीएचसी में 60 से 70 मरीज। इलाके की करीब डेढ़ लाख आबादी को विशेषज्ञों की सलाह, सर्जरी, अल्ट्रासाउंड तथा एक्स-रे समेत अन्य बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल या प्रयागराज के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
विशेषज्ञ के नाम पर सिर्फ एक सर्जन
मानकों के अनुरूप सीएचसी में एक फिजीशियन, एक सर्जन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक महिला रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक एनेस्थीसिया के चिकित्सक और तीन एमबीबीएस होने चाहिए। जबकि, यहां सिर्फ एक सर्जन और एक एमबीबीएस डॉक्टर ही तैनात हैं। ओटी तो बनी है, लेकिन यहां उपकरण नहीं हैं। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की मशीन अब तक नहीं मिली।
50 गांवों के लोग झेल रहे परेशानी
मुजाहिदपुर, पल्हाना, नौगीरा, सगरा, भीखमपुर, बलिहावां, जीवनगंज, जलालपुर, सइंता, बसावनपुर, शेरगढ़, कसियापूरब, सिकंदरपुर बजहा, शोभना, बसेढ़ी, उमरछा, बदनपुर, नरवरपट्टी, हर्रायपुर, मुसीरपुर, लोहरा, पन्नोई, बलकरनपुर समेत 50 गांवों के लोग बेहतर सुविधाओं के लिए प्रयागराज तथा मंझनपुर के चक्कर लगाते हैं।
एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड भी कराना हो तो सीएचसी और पीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी में सर्जन की सलाह मिल जाती है, लेकिन ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है।
छेदीलाल, पठन पुरवा
बच्चों व महिलाओं के उपचार की कोई व्यवस्था ही नहीं है। पीएचसी-सीएचसी जाओ तो जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। अफसरों को जब सुविधाएं बढ़ानी नहीं थीं तो सीएचसी बनाई क्यों।
सूरज पाल, लोहरा
आलमचंद्र सीएचसी में सर्जन के अलावा दंत रोग, बाल रोग विशेषज्ञ और आई सर्जन की भी तैनाती है। चिकित्सकों की कमी की वजह से आई सर्जन को जिला अस्पताल और बाल रोग विशेषज्ञ को यहीं के एसएनसीयू से संबद्ध किया गया है। डेंटल सर्जन अवकाश पर हैं। जैसे ही विशेषज्ञ चिकित्सक जिले को मिलेंगे, वैसे ही आलमचंद्र सीएचसी में प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टर नियुक्त किए जाएंगे।
डॉ.सुष्पेंद्र कुमार
सीएमओ
आलमचंद स्थित मूरतगंज समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
आलमचंद स्थित मूरतगंज समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र। संवाद