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दोआबा में सोमवती अमावस्या के मौके पर सुहागिनों ने पूजा पीपल

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On the occasion of Somavati Amavasya in Doaba, Suhagins worshiped peepal - फोटो : KAUSHAMBI
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दोआबा में सोमवती अमावस्या के मौके पर सुहागिनों ने पूजा पीपल
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परिवार की संपन्नता और पति की दीर्घायु के लिए की कामना
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर/करारी। सावन के महीने में शुभ संयोग के साथ पड़ने वाली सोमवती अमावस्या दोआबा में श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस मौके पर भक्तों ने नजदीकी गंगा घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई। जबकि महिलाओं ने सुबह पीपल के वृक्ष के नीचे 108 बार परिक्रमा कर पूड़ी, पकवान चढ़ाया। परिवार के सुख व पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना भी की।
साल के प्रत्येक महीने में अमावस्या पड़ती है। जानकारों का मानना है कि यदि अमावस्या सोमवार के दिन पड़े तो उसका महत्व बढ़ जाता है। उसमें भी यदि भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना सावन हो तो उसका और ही अधिक महत्व है। सावन की सोमवती अमावस्या पर दोआबा के प्रमुख कस्बों, बाजारों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विवाहित स्त्रियों ने पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा किया। इस दौरान वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा कर परिवार के सुख समृद्घि की कामना किया।
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वहीं सावन के तीसरे सोमवार पर दोआबा के मंदिरों में दिन भर हर-हर,बम-बम की गूंज सुनाई दी। भक्तों को शिव चालीसा के पाठ के साथ पूजन करते देखा गया। घरों पर भी लोगों ने विधि-विधान से पूजा की। इस मौके पर गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं को आस्था की डुबकी लगाई।
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सावन का महीना भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार का खास महत्व है। इस बार सावन के तीसरे सोमवार के दिन अमावस्या भी पड़ गई। जिससे इसका महत्व और बढ़ गया। भोर से ही हो रही बरसात के बाद भी गंगा नदी के पल्हना, संदीपन, कांकराबाद, कड़ा, कुबरी, बजहा, फतेहपुर आदि घाटों पर श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करते देखा गया। करारी के नवग्रह मंदिर, मंझनपुर के बड़ा शिवाला आदि मंदिरों में भक्तों को जलाभिषेक के साथ पूजन अर्चन करते देखा गया। घरों पर लोगो को पूजा, जप, तप करते देखा गया। शक्तिपीठ कड़ा धाम में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। मंदिर बंद होने के कारण भक्त सीढ़ियों पर ही माथा टेककर लौट गए।
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