Old man dies after suffering carelessness in hospital, identified after death
- फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती बिहार प्रांत के लालबहादुर शास्त्री ने मंगलावर रात अंतिम सांस ली। बदनसीबी यह रही कि पुलिस और अस्पतालकर्मियों ने करीब महीनेभर पहले बेहोश मिले लालबहादुर की पहचान कराना भी मुनासिब नहीं समझा। मौत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो उसके पास से तमाम ऐसे सुबूत मिले जिससे उसकी पहचान हुई। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते उसकी पहचान हो जाती तो शायद परिवार के लोग अस्पताल में अंतिम सफर के दौरान उसके साथ हो सकते थे।
26 नवंबर को मंझनपुर स्थित महिला थाने के पास एक 60 वर्षीय बुजुर्ग बेहोशी की हालत में मिला था। राहगीरों ने उसे देखा तो108 एंबुलेंस को खबर दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस बुजुर्ग को जिला अस्पताल ले गई। यहां पहले उसे इमरजेंसी बाद में एक वार्ड में भर्ती किया गया। इस दौरान इलाज का सिर्फ कोरम पूरा किया जाता रहा। बुजुर्ग के कपड़ों की तलाशी भी नहीं ली गई जिससे उसके पास पहचान का कोई आधार मिल सके। ऐसे में साफ है कि अस्पताल में इस लावारिस का इलाज क्या हुआ होगा। मंगलवार रात इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत हो गई। इस पर अस्पतालकर्मियों ने पुलिस को खबर दी।
मौके पर पहुंची सदर कोतवाली पुलिस ने पंचनामा भरने के दौरान उसके कपड़ों की तलाशी ली तो पता चला कि बुजुर्ग के पास राशन कार्ड, डायरी, पेन, गायत्री मंत्र व हनुमान चालीसा की पुस्तिका थी। डायरी में लिखे फोन नंबर पर पुलिस ने कॉल किया तो बुजुर्ग की पहचान खुसुरपुर, जनपद पटना (बिहार) के लालबाबू शास्त्री (60) पुत्र स्व. लक्ष्मण के रूप में हुई। पुलिस ने परिवार के लोगों को फोन किया तो वह दहाड़ मारकर रो पड़े। परिवार के लोग बिहार से कौशाम्बी के लिए रवाना हो गए हैं। इंस्पेक्टर मनीष पांडेय का कहना है कि परिजनों को खबर देने के साथ ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। फिलहाल फोन पर हुई बातचीत के दौरान परिवार के लोगों ने कौशांबी आने की बात कही है।