लॉक डाउन के चलते महाराष्ट्र में फंसे कौशाम्बी के 11 कामगार चार बाइक पर सवार होकर बुधवार को घर आ गए। इनमें से दो कामगार रास्ते में मध्यमप्रदेश की सीमा के पास सड़क हादसे में घायल हो गए। तीन दिन के सफर के बाद घर आने पर सभी ने राहत की सांस ली। सभी कामगारों का कहना है कि अब हियै कमाबै खाबै, परदेश कभो न जाबै।
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर जारी लॉक डाउन के बीच सरकार की ढील के कारण प्रवासियों के घर लौटने का सिलसिला जारी है। इधर, हफ्ते भर से रोजाना एक हजार से भी ज्यादा प्रवासी जिले में आ रहे हैं। बुधवार को 11 प्रवासी चार बाइक पर सवार होकर महाराष्ट्र से घर आए। जत्थे में शामिल पूूरबशरीरा निवासी लक्ष्मीनारायण, सरायअकिल के चकपिनहा निवासी मनीष, सैनी के गेरिया निवासी आशीष, रामचंद्र व मंझनपुर कोतवाली के ओसा गांव निवासी अरविंद कुमार, शिवकुमार, शुभम, जयप्रकाश, अमरसिंह और जयसिंह आदि कामगारों ने बताया कि साधन नहीं मिलने के कारण वह सभी मुंबई से दस मई की रात चार बाइक से घर के लिए निकल पड़े। रास्ते मे तमाम बाधाएं आईं। कहीं बाइक खराब हुई तो कहीं पुलिस ने अवरोध डाला। इसके बाद भी हौसला कम नहीं हुआ।
पुलिस परेशान ना करे इसके लिए दिन में कही रुककर एकांत में विश्राम करते और रात्रि में यात्रा करते थे। 12 मई की रात रास्ते मे मध्यप्रदेश की सीमा पर मवेशी को बचाने में एक बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस बाइक पर सवार ओसा निवासी अमर सिंह और जय सिंह घायल हो गए। बुधवार को बांदा चित्रकूट के रास्ते महेवाघाट से होते हुए जनपद के सीमा में पूरबशरीरा अपने साथी लक्ष्मी नारायण के साथ आए सभी कामगारों को ग्रामीणों ने क्वारंटीन सेंटर बने प्राइमरी स्कूल भेज दिया। यहां सभी को समाजसेवी डॉ. सोहन लाल विश्वकर्मा ने खाना खिलाया। साथ ही सभी को जिला अस्पताल जाकर थर्मल स्क्रीनिंग करांने की सलाह दी। लॉक डाउन में मिले दर्द बयां करते हुए सभी कामगारों ने कहा कि अब अपने गांवै मां कमाबै-खाबै, परदेश कभौ न जाबै।