मंझनपुर। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पशुपालकों की किस्मत अब संवरने वाली है। इनकी माली हालत सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने माइक्रो कामधेनु योजना की शुरूआत की है। यह निर्णय कामधेनु और मिनी कामधेनु योजना की असफलता के बाद लिया गया है। योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों के साथ ही कौशाम्बी को भी लक्ष्य आवंटित है। उम्मीद है कि जल्द ही जिले के पशुपालकों का चयन कर उन्हें डेयरी खोलने को मिलने वाली मदद उपलब्ध करा दी जाएगी।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने पशुपालकों को दूध के व्यवसाय से जोड़कर उन्हें तंगहाली से निजात दिलाने को जून 2013 में कामधेनु योजना की शुरूआत की थी। इसके पांच महीने बाद नवम्बर में मिनी कामधेनु योजना प्रारम्भ की गई। उस समय कामधेनु योजना का लक्ष्य प्रदेश में 75 डेयरी और मिनी कामधेनु का लक्ष्य 150 डेयरी स्थापित करने का था। कामधेनु योजना की डेयरी में 100 मवेशी और मिनी कामधेनु डेयरी में 50 मवेशी पाले जाने थे।
बाद में जनवरी 2014 में कामधेनु योजना का लक्ष्य पूरे प्रदेश में बढ़ाकर 425 डेयरी और मिनी कामधेनु योजना का लक्ष्य 2500 कर दिया गया। मगर किसी भी जिले में इस योजना का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। कौशाम्बी में तो दोनों योजनाएं पूरी तरह से फ्लाप हो चुकी हैं। इन योजनाओं के असफल होने से प्रदेश सरकार चिंतित हो गई। लक्ष्य की पूर्ति नहीं होने की बाबत जांच कराई गई तो पता चला अधिकतर जिलों में इतने ज्यादा पशु पालने के लिए सक्षम और बड़े पशुपालक नहीं हैं।
इसे देखते हुए सरकार ने कामधेनु योजना का लक्ष्य प्रदेश भर में घटाकर 425 से 300 और मिनी कामधेनु का लक्ष्य 2500 से 1500 डेयरी स्थापित करने का कर दिया है। इसके अलावा छोटे पशुपालकों के लिए माइक्रो कामधेनु योजना की भी शुरूआत कर दी है। इस योजना की डेयरी में 25 मवेशी ही पाले जाने हैं। कौशाम्बी जिले में माइक्रो योजना के तहत 20 डेयरी स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित है जबकि कामधेनु डेयरी का लक्ष्य तीन और मिनी कामधेनु डेयरी का लक्ष्य 10 है। मवेशियों की संख्या कम होने की वजह से माना जा रहा है कि पशुपालक माइक्रो डेयरी खोलने को आगे आएंगे।