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Kaushambi News: न दवाइयों को रखने की व्यवस्था, न मरीजों के बैठने का इंतजाम

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चायल के यूनानी अस्पताल का हाल। - फोटो : KAUSHAMBI
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चायल। कस्बे में अंग्रेजों के जमाने से संचालित यूनानी अस्पताल भी गजब का है। यहां भवन न लैब है और न ही डॉक्टर नियमित आते हैं। अस्पताल में तैनात वार्ड ब्वॉय रोजाना तकरीबन डेढ़ सौ मरीजों की जांच कर उन्हें दवाएं दे रहा है। अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इतना ही न ही दवाओं को रखने के लिए कोई जगह भी नहीं निर्धारित है। छप्परनुमा दो कमरे में संचलित अस्पताल में शुक्रवार को डॉक्टर गैरहाजिर रहे। वार्ड ब्वॉय ही मरीजों का इलाज करता मिला।
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चायल कस्बे में संचालित अस्पताल की स्थापना वर्ष 1906 में हुई थी। तब से इस अस्पताल में एक डॉक्टर, एक कंपाउंडर और एक वार्ड ब्वॉय की तैनाती की गई है। छप्परनुमा दो कमरे में संचालित अस्पताल की हालत खराब है। जर्जर कमरों में से एक में डॉक्टर और वार्ड ब्वाय बैठता है। जबकि दूसरे में ताला लगा हुआ है। बरामदे में दवाएं रखी हुई हैं। प्रतिदिन सुबह दस बजे तक इलाज कराने वाले मरीज आ जाते हैं। अस्पताल में जगह नहीं होने के कारण वह बरामदे में ही खड़े हो जाते हैं। इसके बाद वार्ड ब्वॉय बारी बारी से मरीजों को कमरे में बुला कर इलाज करता है। शुक्रवार को भी अस्पताल में ऐसी ही स्थिति रही।
डॉ. फरीद अहमद छुट्टी पर थे। इस दौरान वार्ड ब्वॉय ने ही मरीजों की जांच की और दवा दी। वार्ड ब्वॉय अब्दुल अजीज ने बताया कि प्रतिदिन सौ से लेकर डेढ़ सौर मरीजों का वह इलाज करता है। जर्जर अस्पताल में भले ही सुविधाओं एवं संसाधनों का टोटा हो, फिर भी मरीजों की भीड़ लगती है।
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यूनानी पद्धति से बीमारियों का बेहतर इलाज होता है। छप्पर नुमा इस अस्पताल में मरीज, डॉक्टर और स्टाफ को बराबर खतरा बना रहता है।- हबीब अहमद
अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर और कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन यहां पर तैनात डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। वार्ड ब्वॉय ही इलाज करता है।- महेश यादव
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यूनानी अस्पताल चायल की एक पहचान है, लेकिन अनदेखी के कारण अस्पताल का अब अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।- अब्दुल अव्वल
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दवाओं को रखने के लिए भी जगह नहीं है। अपने निजी खर्चे से अस्पताल की रंगाई-पुताई कराते हैं। प्रत्येक वर्ष छप्पर को बनवाया जाता है। ताकि बरसात का पानी न भरे।- अब्दुल अजीज, वार्ड ब्वॉय
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लोग यूनानी पद्धति से इलाज कराने में विश्वास करते हैं, लेकिन इलाज कराएं भी तो कैसे। अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं बैठते हैं। अस्पताल में नियमित डॉक्टर की तैनाती हो।- शैलेश सिंह
यूनानी अस्पताल चायल में तैनात संविदा चिकित्सक मेडिकल पर चले गए हैं। उनकी जगह पर करारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. फरीदउद्दीन को सप्ताह में तीन दिन के लिए संबद्ध किया गया है। अस्पताल के भवन की मरम्मत कराने के लिए जिला पंचायत को पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही नए भवन के निर्माण के लिए कस्बे में जमीन चिह्नित कर ली गई है। भूमि हस्तांतरित होने के बाद शासन से बजट की मांग की जाएगी। -डॉ. अनीता सिंह, जिला क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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