जन्माष्टमी पर जहां मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और बांसुरी की मधुर धुन गूंजती रही वहीं मंझनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में किलकारियों की आवाज ने माहौल को और भी पावन बना दिया। शनिवार को यहां कुल नौ बच्चों ने जन्म लिया। इनमें तीन बालिकाएं और छह बालक हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार बेटियों को राधा और बेटों को कान्हा कहा गया। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र का पूरा स्टाफ गदगद हो उठा।
शनिवार की सुबह से ही पीएचसी में गर्भवती महिलाओं का प्रसव शुरू हो गया था। सबसे पहले देररात करीब 3:45 बजे एक बालक ने जन्म लिया। इसके बाद क्रमशः प्रसव होते रहे और कुल नौ बच्चों ने दुनिया में कदम रखा। ठीक मध्यरात्रि 12 बजे भी एक शिशु का जन्म हुआ जिसे अस्पताल स्टाफ ने कृष्ण जन्म के साथ जोड़ा।
अस्पताल के रजिस्टर में जब यह आंकड़ा दर्ज हुआ तो स्टाफ नर्स और डॉक्टरों के चेहरे पर खुशी झलक उठी। सभी ने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इतने बच्चों का जन्म होना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि सभी नवजात और उनकी माताएं पूरी तरह स्वस्थ हैं। बच्चों को जरूरी टीके और दवाइयां दी गईं। अस्पताल प्रशासन ने साफ-सफाई और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा। नवजात शिशुओं के परिजनों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मंदिरों में भजन-कीर्तन के बीच अस्पताल में गूंजतीं किलकारियों ने माहौल को विशेष बना दिया। तीन राधा और छह कान्हा के जन्म से मंझनपुर पीएचसी पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बन गया।
गर्भवतियों की सेवा में जुटा रहा स्टाफ
जन्माष्टमी की रात नौ शिशुओं के जन्म का मंझनपुर पीएचसी का पूरा स्टाफ साक्षी बना। स्टाफ नर्स अन्नपूर्णा, शरद चौधरी, शिवानी पटेल और प्रीति यादव के साथ एएनएम शशि प्रभा, ममता, मीना गुवारा, पूजा यादव, आशा कार्यकर्ता सुनीता प्रजापति और वार्ड बॉय चिंगु लाल ने पूरी निष्ठा और उत्साह से सेवाएं दीं। उनका कहना था कि त्योहार की घड़ी में इतने बच्चों का जन्म होना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव और अलग ही उत्साह का क्षण है।
परिवार के लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई
किसी ने अपने बच्चे का नाम कृष्ण रखने को कहा तो किसी ने राधा नाम सोच रखा है। एक महिला ने मुस्कराते हुए कहा, जन्माष्टमी पर मेरे घर कान्हा आए हैं, इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है। इसी बीच परिवार के लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। इस मौके पर स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ नर्सें भी उत्साह से लबालब नजर आईं।
उन्होंने कहा कि पीएचसी में प्रसव तो अक्सर होते हैं लेकिन त्योहार के दिन इतनी बड़ी संख्या में एक साथ बच्चों का जन्म होना पहली बार देखने को मिला है। स्थानीय लोग भी इस संयोग को लेकर चर्चा करते दिखे। उनका कहना था कि यह आने वाले समय के लिए शुभ संकेत है और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की जानी चाहिए।
इनके यहां गूंजीं किलकारियां
- शिवपुर बसोहनी की सोनम यादव बोलीं, सुबह कान्हा का आना सौभाग्य है।
- निजामपुर हंडिया की बेबी पाल ने कहा, लगता है सचमुच कृष्ण आ गए।
- ओसा की सोनी के पिता बोले, राधा के जन्म से घर पावन हो गया।
- चकसहनपुर की पुष्पा ने कहा, बेटी का जन्म हमारे लिए वरदान है।
- कड़ा की रीता देवी ने बेटे का नाम कान्हा तय किया।
- ओसा की निशा बोलीं, जन्माष्टमी पर पुत्र रत्न मिलना शुभ संकेत है।
- रामपुर मंडूकी की अनु ने कहा, भजन-कीर्तन के बीच बेटे की किलकारी ने पूरे घर का माहौल बदल दिया।
- कोर्रों की पूजा बोलीं, हमारी बेटी अब राधा कहलाएगी।
- वंश का पूरा की सकीना ने कहा, ठीक जन्माष्टमी की घड़ी में कान्हा का जन्म होना चमत्कार है।