। त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही जिले के व्यापारी जीएसटी की नई दरों को लेकर असमंजस में हैं। सोमवार से नई दरें लागू हो रही हैं, जिससे बाजार में सामानों की कीमतों का पूरा समीकरण बदल जाएगा। व्यापारी उलझन में हैं कि मौजूदा दरों पर सामान खरीदें या नई दरों का इंतजार करें।
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष और जीएसटी के जानकार प्रवेश कुमार केसरवानी ने बताया कि दुर्गा पूजा से लेकर दिवाली तक जनपद में करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। कपड़े, मिठाई, सजावट सामग्री, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री, यात्रा और मनोरंजन जैसे हर क्षेत्र में रौनक रहती है।
दरों में कमी से इस बार ग्राहकों का खर्चा 15 से 20 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है। व्यापारियों की उलझन यह है कि पहले से रखा स्टॉक अब कम दाम पर बेचना पड़ेगा।
जीएसटी अधिवक्ता रामप्रकाश मिश्रा ने बताया कि यदि व्यापारी ने ऊंची दर पर माल खरीदा है और नई दर पर बेचना होगा, तो आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) समायोजन में अंतर आएगा। जो आईटीसी 28 फीसदी पर मिला है, उसे 18 फीसदी पर एडजस्ट करना होगा। शेष 10 फीसदी क्रेडिट लेजर में फंसा रहेगा, जिसका उपयोग भविष्य के टैक्स में समायोजित किया जा सकता है या फिर रिफंड क्लेम कर वापस लिया जा सकता है।
बड़ी कंपनियों ने पहले ही दाम घटा दिए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिल जाएगा, लेकिन रिटेलर स्तर पर, खासकर किराना और मशीनरी की खरीद पर घटे दाम का फायदा ग्राहकों तक पहुंच पाना आसान नहीं होगा।