सपनों के साकार होने की उम्मीद दिखी तो किसी को बजट ने किया निराश
- महंगाई घटने की आस न दिखने से छाई मायूसी, किसानों के सपनों पर भी फिरा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। केंद्र सरकार के आम बजट से कहीं खुशी तो कहीं निराशा है। आवास के लिए 66 फीसदी बजट बढ़ने से उन गरीबों की उम्मीदें फिर जवां हो गई हैं जो सालों से पक्के आवास का सपना देख रहे हैं। एक साल और मुफ्त राशन के वितरण के निर्णय को गरीबों के हित में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। हालांकि, महंगाई को कम करने के ठोस प्रयास इस बजट के सहारे नहीं किए गए हैं, जिसे लेकर लोगों में मायूसी है। किसानों को भी कोई विशेष सौगात इस बजट में नहीं मिली। इससे यह वर्ग भी उदास है। राजनीतिक दलों ने इस बजट को महंगाई बढ़ाने वाला बताया है।
किसानों के लिए बजट निराशाजनक रहा। ऋण का लक्ष्य बढ़ाकर अन्नदाताओं को कर्जदार बनाने की राह तो खोली गई, लेकिन उनकी आमदनी बढ़ाने का कोई इंतजाम नहीं हुआ। न तो एमएसपी पर सकारात्मक पहल की गई और न ही खेती में आ रहीं दिक्कतों को दूर करने का प्रयास किया गया।-
नूरुल इस्लाम, जिलाध्यक्ष भाकियू (अराजनैतिक)
किसानों की आय दोगुनी करने के केंद्र सरकार के दावे की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। फिर भी इसके लिए बजट में कोई अतिरिक्त धन का आवंटन नहीं किया गया। न ही किसानों की खुशहाली के लिए बजट में कोई खास योजना या नीति बनाई दिखी। यह बजट किसान विरोधी है।-
अजय सोनी, किसान नेता, समर्थ किसान पार्टी
देश में सदैव बचत को प्रोत्साहित किया गया है, लेकिन इस बजट ने पुरानी कर व्यवस्था में बचत के संबंध में कोई छूट नहीं दी गई है। नई कर प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए सात लाख तक की आय पर शून्य कर का प्रावधान किया गया है। इससे अधिक आय वालों को बजट से सिर्फ निराशा हाथ लगी है।
- ओमदत्त त्रिपाठी, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कौशाम्बी
बजट पूरी तरह से भ्रामक और दिशाहीन है। मोदी सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने, गरीबों को पक्का मकान देने जैसे लोक लुभावने वादे किए थे, जो इस बजट से पूरी तरह गायब हैं। बेरोजगारी दूर करने का वादा एक बार फिर खोखला साबित हुआ। महंगाई कम करने का बजट में कोई प्रावधान नहीं है। गृहणियों में भी बजट कोई उम्मीद नहीं जगाता है।
- अरुण विद्यार्थी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
केंद्र सरकार का यह बजट किसी लायक का नहीं है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित को देखते हुए बजट बनाया गया है। इसमें किसानों, नौजवानों, विद्यार्थियों के लिए कुछ नहीं है। न बेरोजगारी दूर करने की कोई योजना है और न ही महंगाई पर अंकुश की। सपा इस बजट की निंदा करती है।
- दया शंकर यादव, जिलाध्यक्ष सपा
केंद्र सरकार की ओर से पेश किया गया बजट सराहनीय है। सरकार ने हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए बजट बनाया है। गरीब, महिलाओं, व्यापारियों, उद्यमियों, युवाओं हर किसी को इस बजट ने कुछ न कुछ दिया ही है। किसानों के लिए भी यह बजट कई सौगात लेकर आया है। इस बजट की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।-अनीता त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
समाज के दबे कुचले वर्ग के लोगों के लिए यह जनविरोधी बजट है। इससे समाज का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। इस बजट से देश का कुछ भला नहीं हो सकता है। मैं इस बजट का विरोध करता हूं। जिसकी जितनी भागदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी को ध्यान में रखकर सरकार को बजट पेश करना चाहिए।-
केेएल गौतम, जिलाध्यक्ष, बसपा
यह आम बजट महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला है। पहले से ही महंगाई से परेशान आमजन को इस बजट से कोई सहूलियत नहीं मिली है। यह बजट पूरी तरह से जन विरोधी है। बेरोजगारी से जूझ रहे युवा हो या शिक्षा क्षेत्र, किसी भी क्षेत्र को कुछ ऐसा नहीं मिला, जिसे अच्छा कहा जा सके।
-हाजी मोहर्रम अली, जिलाध्यक्ष, लोकतांत्रिक जनता दल
भाजपा अपने बजट का दशक पूरा कर रही है। जब जनता को पहले कुछ न दिया तो अब क्या देगी। भाजपाई बजट महंगाई व बेरोजगारी को और बढ़ाता है। किसान, मजदूर, युवा, महिला, नौकरीपेशा, व्यापारी वर्ग में इससे आशा नहीं निराशा बढ़ती है, क्योंकि ये चंद बड़े लोगों को ही लाभ पहुंचाने के लिए बनता है।
-पूजा पाल, विधायक, चायल
बजट में आयकर स्लैब की प्रस्तावित नई दरें नागरिकों के हित में है। कर कम देना पड़ेगा, किंतु इतनी महंगाई में छूट की सीमा महज तीन लाख रखना संतोषजनक नहीं है। उद्योग और व्यापार की तरह कृषकों के लिए भी सब्सिडी पर कर्ज देकर कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।
-रामप्रकाश मिश्रा, प्रांतीय उपाध्यक्ष, यूपी कर अधिवक्ता संघ
बजट व्यापारियों के लिए लाभकारी है। पहले ढाई लाख वार्षिक आमदनी पर कोई टैक्स नहीं था। अब इसे 50 हजार और बढ़ा गया है। यानी तीन लाख तक की इनकम पर टैक्स चुकाने से निजात मिल जाएगी।
- अंशुल केसरवानी, अध्यक्ष, मंझनपुर व्यापार मंडल
व्यापारियों को इस बजट से कोई बहुत अधिक फायदा होने वाला नहीं है। कम से कम से 10 लाख तक की आदमनी पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। यह छूट बजट में दी जाती तो बेहतर होता लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे व्यापारी वर्ग खासा मायूस है।
- विपिन केसरवानी, अध्यक्ष, पूरब शरीरा पश्चिम शरीरा व्यापार मंडल
बजट में उद्योग क्षेत्र, व्यापार क्षेत्र एवं कर्मचारियों को कई प्रकार की सुविधाएं दी गई हैं, जो सराहनीय हैं। यह बजट आम आदमी एवं मध्यम वर्ग के के लिए लाभकारी है। इसमें आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख की गई है। जिनको पूर्व में पांच लाख की आयकर छूट मिलती थी, उन्हें अब सात लाख तक आयकर छूट मिलेगी।
-रमेश अग्रहरि, वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
बजट में गरीबों को मुफ्त में अनाज वितरण के लिए व्यवस्था की गई है। यह सुनकर अच्छा लगा। महंगाई के इस दौर में परिवार पालना मुश्किल हो रहा है। कम से कम एक साल तक राशन की तरफ से थोड़ी चिंता कम रहेगी। हां, महंगाई को कम करने के लिए भी कुछ बेहतर प्रयास होते तो ज्यादा अच्छा था।
- श्यामबाबू द्विवेदी, पिपरहटा
सुनने में आया है कि सरकार की ओर से पेश किए गए बजट में गरीबों के लिए आवास को अतिरिक्त बजट मिला है। काफी दिनों से पीएम आवास योजना का लाभ पाने के लिए दौड़ रहा हूं। बजट अधिक मिलने से उम्मीद है कि मेरे जैसे तमाम गरीबों का पक्के मकान का सपना अब पूरा हो जाएगा।-
बालकृष्ण, मायाराम का पुरवा
बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। पढ़ने-लिखने के बाद तमाम युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। इनके लिए कुछ खास इस बजट में नहीं दिया गया। सरकारी विभागों में खाली पद भरे नहीं जा रहे हैं, सरकारी योजनाओं के तहत बैंक से ऋण लेना आसान नहीं। सरकार को इसका कुछ रास्ता निकालना चाहिए था।
- वरुण त्रिपाठी, म्योहर
शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार की जरूरत है। गरीब वर्ग के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा अब भी एक सपना है। कहने के लिए तो प्राइमरी स्कूल से लेकर इंटर कॉलेज और तकनीकी शिक्षा के लिए आईटीआई समेत अन्य सरकारी संस्थान खोले गए हैं, लेकिन वहां पर इंतजाम कैसे है, इसे भी देखना चाहिए। इसमें सुधार लाने वाला बजट नहीं है।
-मुन्नू पाल,भैला मखदूमपुर
बजट कहीं से महंगाई कम करता नहीं दिख रहा है। आटा, दाल, चावल, गेहूं हर चीज के दाम बढ़ रहे हैँ। जिससे गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है। इस बजट से काफी उम्मीदें थीं। लगा था कि शायद कुछ राहत मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- सुनीता केसरवानी, भरवारी
महंगाई कम करने का भी इस बजट में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। खासकर गृहस्थी के सामान के दाम घटाने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। रसोई गैस लेकर तेल तक सबके दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई के चलते बचत नहीं हो पा रही है। इस बजट ने भी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।-
वागिसा केसरवानी, भरवारी