सरकार ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब योजना के तहत अल्पसंख्यकों को मंडियों में दुकान व चबूतरा आवंटित करने का लक्ष्य तय किया था। अफसरों ने सरकार की मंशा पर पानी फेर रखा है। मंडल में 87 दुकानों का आवंटन होना था, लेकिन अब तक 09 दुकान ही आवंटित हो सकी हैं। इस वर्ष 34 दुकानों का आवंटन होना था, लेकिन अभी तक इसमें कोई कार्रवाई ही आगे नहीं बढ़ सकी। इनमें सबसे खराब स्थिति कौशाम्बी की है। यहां चार दुकानों में से मात्र एक दुकान ही अल्पसंख्यक कोटे को अब तक दी गई है।
मंडी समिति की दुकानों में अल्पसंख्यकों को स्थापित करने के लिए सरकार ने एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब योजना शुरू की थी। इस योजना का मकसद था कि किसानों की सब्जी व राशन मंडी तक पहुंचाना। इसके अलावा अल्पसंख्यकों को एक निर्धारित कोटे के तहत दुकान व चबूतरा आवंटित करना। कौशांबी में अल्पसंख्यकों को चार दुकानों का आवंटन होना था, लेकिन मंडी में एक ही दुकान आवंटित की गई। यही हाल मंडल के सभी जिलों का रहा। मंडल में कुल 87 दुकानें आवंटित होनी थी। पिछले साल कुल नौ दुकानें आवंटित की गई थी। इस वर्ष 34 दुकानें आवंटित होनी थी, लेकिन अभी तक आवंटन एक भी दुकान का नहीं हुआ। समीक्षा बैठक में इसका खुलासा हुआ तो प्रमुख सचिव रजनीश गुप्ता ने इस पर नाराजगी जताई। साथ ही सूबे के सभी जिलों की सूची अधिकारियों को भेजकर जल्द से जल्द निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने का निर्देश दिया है।
दुकान के लिए होती है मारामारी
मंडी समिति में दुकान हासिल करने के लिए लोगों में मारामारी होती है। लोग अपनी पहुंच का फायदा उठाकर दुकान व चबूतरा हासिल कर लेते हैं, लेकिन जरूरतमंदों की दाल नहीं गलती। यही कारण है कि सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए कोटे की व्यवस्था मंडी समिति में की थी। इसके बाद भी अल्पसंख्यक दुकान के लिए मारे-मारे घूम रहे हैं।