much problems in the home village of mla
- फोटो : KAUSHAMBI
दोआबा में माननीयों के गांव भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सदर विधायक के पैतृक गांव का हाल तो यह है कि वहां बिजली, पानी, सड़क और खड़ंजा जैसी व्यवस्थाएं भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हैं। इसे लेकर गांव के लोगों में नाराजगी है। उधर, अफसर और जनप्रतिनिधि शिकायत के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। ‘अमर उजाला’ टीम शुक्रवार को विकास कार्यों का जायजा लेने सदर विधायक लालबहादुर के पैतृक गांव बनी खास पहुंची। पहली नजर में ही यहां जनसमस्याओं का अंबार देखने को मिला। लगभग 12 सौ की आबादी वाले इस गांव की मलिन बस्ती में तकनीकी खराबियों के कारण महीने भर से बिजली नहीं है। लिहाजा लोगों को अंधेरे में गुजारा करना पड़ रहा है।
यूं तो गांव में लगे सभी 25 हैंडपंप सही हैं। लेकिन, पानी भरने वालों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ देर बाद वे गंदा पानी उगलने लगते हैं। यहां पर और हैंडपंपों की जरूरत है। सड़कों का हाल ये है कि आधे से ज्यादा इलाके में बनी ही नहीं हैं। दर्जनों लोगों के आवास सालों से अधूरे पड़े हैं। कुछ को आवास योजना का लाभ ही नहीं मिला है। शौचालयों की दशा भी कुछ ऐसी ही है। सफाई नियमित नहीं होने के कारण हर ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नालियां टूटी होने के कारण गंदा पानी उफनकर सड़कों पर बहता रहता है। इसकी एक वजह सफाई का नहीं होना भी है। विधवा, वृद्घा, विकलांग आदि पेंशन योजनाओं से भी पात्र वंचित हैं। ग्रामीणों की मानें तो उन्होंने समस्याओं से कई बार विधायक के साथ ही अफसरों को भी अवगत कराया, पर किसी ने ध्यान देना ठीक नहीं समझा। कोरा आश्वासन भर सभी ने दिया है।
बोले विधायक
गांव में विकास कार्य कराए गए हैं। कोरोना की वजह से कुछ अव्यवस्थाएं हुई हैं। समस्याओं के बाबत प्रधान-सेक्रेटरी से बात की जाएगी। जल्द ही सभी दिक्कतें दूर करा दी जाएंगी।
लालबहादुर- विधायक, मंझनपुर।