टेवां गांव में गिरे पीपल के पेड़ को परिजनों व ग्रामीणों से जड़ से हटवाने की उठाई मांग। संवाद
जिस आंगन में दो दिन पहले तक मासूम प्रिंस की हंसी गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। बिजली का पोल गिरने से इकलौते बेटे की मौत के दूसरे दिन भी मां सुनीता देवी बदहवास होकर बार-बार बेटे को पुकारती रहीं, जबकि परिजन उन्हें संभालने में जुटे रहे। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए दिनभर रिश्तेदारों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों का घर पर तांता लगा रहा।
टेवां गांव में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद परिवार अब भी सदमे में है। मां सुनीता देवी कभी बेटे के कपड़ों को सीने से लगाकर रो पड़तीं तो कभी उसकी याद में बेसुध हो जातीं। पिता मनोज सरोज भी गहरे सदमे में हैं और किसी से ठीक से बात नहीं कर पा रहे हैं। वहीं घायल बेटी जानवी का इलाज जारी है।
नाना प्रभु दयाल और अन्य परिजन हर आने वाले को हादसे की दर्दनाक कहानी सुनाते-सुनाते भावुक हो उठते। ग्रामीणों का कहना है कि एक छोटी-सी लापरवाही ने पूरे परिवार की खुशियां उजाड़ दी। परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने प्रशासन से हादसे वाले पीपल के पेड़ को हटवाने की मांग दोहराते हुए कहा कि अब किसी और परिवार का चिराग नहीं बुझना चाहिए।