निगरानी समितियों को नहीं पता कितने आए प्रवासी
-कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में निष्क्रिय हुई ग्राम पंचायतों में गठित अधिकतर समितियां
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। दोआबा की ग्राम पंचायतों में बनीं अधिकतर निगरानी समितियां निष्क्रिय हैं। निगरानी समितियों की लापरवाही के कारण प्रशासन को गांवों में बाहर से आने वालों की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं वह घर पर हैं या नहीं इसकी भी निगरानी नहीं की जा रही है।
पिछले साल कोरोना संक्रमण फैलने के बाद सभी ग्राम पंचायतों में शासन के आदेश पर निगरानी समितियों का गठन किया गया था। कुल 451 ग्राम पंचायतों में इनका गठन कर उन्हें सक्रिय किया गया था। इसमें एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, राशन डीलर समेत अन्य को शामिल किया गया था। इनकी जिम्मेदारी थी कि वह बाहर से आने वाले सभी प्रवासियों की जानकारी प्रशासन को दें। साथ ही कम से कम 14 दिन तक उन्हें घर में रहने के लिए प्रेरित करें। लेकिन, इस बार समितियां निष्क्रिय बनीं हुईं हैं। प्रशासन को निगरानी समितियों ने यह जानकारी नहीं दी कि उनके गांव में कब और कितने प्रवासी आए हैं। इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है। इसके बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही
मंझनपुर। सभी निगरानी समितियों को ग्राम पंचायत की तरफ से थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर दिए गए थे। इससे प्रवासियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जानी थी। लेकिन अब ग्राम पंचायतों में न तो थर्मल स्कैनर नजर आते हैं और न ही पल्स ऑक्सीमीटर।
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इनका कहना है
सभी निगरानी समितियों को सक्रिय रहने के आदेश दिए गए हैं। उन्हें थर्मल स्कैनर भी दिए गए हैं। एक बार फिर समितियों को निर्देशित किया जाएगा।
गोपाल जी ओझा, डीपीआरओ