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अलविदा अलविदा मेरे इमाम अलविदा

Thu, 13 Oct 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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अलविदा अलविदा मेरे इमाम अलविदा...शाहे इमाम अलविदा...इन्हीं मातमी बोलों के बीच बुधवार को करबला में अकीदत के फूल दफन कर दिए गए। इससे पहले मुहर्रम की दसवीं पर जिले के विभिन्न कस्बों के इमाम बारगाह से ताजिया उठाए गए। जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने रास्तेभर नौहाखानी, सीनाजनी और जंजीरी मातम किया।
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दस मुहर्रम की सुबह होते ही अजाखानों से हाय हुसैन, हाय हुसैन की सदाओं ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। अजाखाने वीरान हो गए। अलविदा अलविदा या हुसैन अलविदा की सदाएं दिनभर सुनाई देती रहीं। पूरे दिन अजादारों ने इमाम चौक और इमाम बारगाह में ताजिया रखकर अपने गम का इजहार किया। दोपहर दो बजे मंझनपुर, करारी, भरवारी आदि अन्य कस्बों से ताजिया उठने शुरू हुए। ताजिया लेकर जुलूस की शक्ल में करबला की ओर निकले अजादार इस दौरान रास्तेभर नौहाखानी, सीनाजनी और जंजीरी मातम करते रहे। करारी में इमाम चौक से पहला ताजिया उठा। इसके बाद हुसैनिया शरीफाबाद, अंसारगंज आदि से ताजिया उठाए गए।

ताजिया लेकर निकले जुलूस में शामिल अजादार मातम करते हुए करबला की तरफ चले। दारानगर स्थित  मरहूम जग्गन मियां, मरहूम लाल मियां और कासिम हुसैन, चौक से डॉ हासिम,  मरहूम हबीब साहब, डॉ एजाज हुसैन आदि के इमाम बारगाह से अलम व ताबूत बरामद हुआ। जहां मोहम्मद अब्बास, फिरोज, परवेज आदि ने नौहा पढ़ा। करारी में जमीर हैदर, जवाद हैदर, जावेद रिजवी, एहसान हैदर, फुरकान आदि ने मर्सिया पढा कहा  आज शब्बीर, पा क्या आलमे तनहाई है, जुल्म के चांद पे जहरा के घटा छाई है। हसन अब्बास और महमूद अली ने नौहा पढ़ा शब्बीर बहुत ही प्यासे थे एक बूंद नहीं पाया पानी, थी खुश्क जुबां मुंह से निकली और सामने बहुत था पानी।
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इसके बाद इमाम बारगाह से ताजिया लेकर जुलूस करबला पहुंचा। जहां अकीदत के फूल दफन किए गए। सादीपुर और कटरा से ताजिया लेकर या अली, या हुसैन करते हुए जुलूस करबला पहुंचा। रास्ते में बाकर अली ने नौहा पढ़ा और अकीदतमंदों ने जंजीर का मातम किया। इसी तरह से भरवारी, मूरतगंज, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, पुरखास, मनौरी, कडा, अलीपुर जीता, दरियापुर जीता आदि स्थानों पर भी जुलूस निकालकर लोगों ने इमाम की याद ने आंसू बहाए।

घोसिया में पुलिस ने रोका ताजिया का जुलूस
सरायअकिल के घोसिया रोड से बुधवार की शाम को उठा ताजिया का जुलूस महमूदनगर की ओर बढ़ा तो पुलिस ने रोक दिया। इसका लोग विरोध कर रहे थे। लोगों ने पुलिस को बताया कि यह नया रास्ता है। पुलिस ने ताजिया जुलूस रोक दिया तो नोंकझोंक शुरू हो गई। इससे तनावपूर्ण माहौल बन गया। इस दौरान किसी ने अफवाह उड़ा दी थी कि मारपीट हो गई है। इसको लेकर भी माहौल गरमाया रहा। हालांकि पुलिस ने तस्वीर साफ कि ऐसी कोई बात नहीं है।

खोंपा में देर रात तक हलाकान रही पुलिस
सरायअकिल के खोंपा गांव में भी रास्ते के विवाद को लेकर माहौल गरम रहा। मंगलवार की देर रात एसडीएम चायल ने किसी तरह मामले को हल निकलवाया तो लोगों ने राहत की सांस ली। खोंपा गांव में इस विवाद को लेकर तनावपूर्ण स्थिति कई दिनों से बनी रही।
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