नगर पंचायत अजुहा में मोक्ष धाम का पुर्ननिर्माण कराए जाने के लिए शासन ने एक करोड़ 12 लाख रुपये आवंटित किया है। शिकायत है कि ठेकेदार ने नगर पंचायत की मिलीभगत से काम की फर्ज अदायगी दिखाकर 60 लाख रुपये निकाल लिया। एडीएम के निरीक्षण में इस वित्तीय घोटाले की पोल खुल जाने से नगर पंचायत में हड़कंप मच गया है।
बता दें कि नगर पंचायत अजुहा में हाईवे किनारे शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए मोक्ष धाम बना हुआ है। इसे विकसित करने के लिए नगर पंचायत की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। बताते हैं कि शासन ने इसका जीर्णोद्घार कराए जाने के लिए एक करोड़ 12 लाख रुपये आवंटित किया था। इस बजट से मोक्ष धाम का कायाकल्प 30 अगस्त तक होना है। पर, शिकायत है कि नगर पंचायत की मिलीभगत से बिना काम कराए 60 लाख रुपये निकाल कर हड़प कर लिए गए।
दिखावे के लिए मौके पर कुछ पिलर खड़े करा दिए गए। इस बात का खुलासा 26 जुलाई को एडीएम श्रीकृष्ण के मुआयना के दौरान होने पर वित्तीय घोटाला करने वालों को सांप सूंघ गया। मोक्ष धाम पुर्ननिर्माण के नाम पर बिना काम कराए सरकारी धन का गबन किए जाने में नगर पंचायत के अवर अभियंता की भूमिका भी खुलकर सामने आ रही है। इस वित्तीय घोटाले को एडीएम ने बेहद गंभीरता से लेते हुए शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
घोटाले में मेरी कोई भूमिका नहीं: शांति कुशवाहा
नगर पंचायत अजुहा की चेयर पर्सन शांति कुशवाहा का कहना है कि मोक्ष धाम पुर्ननिर्माण में हुए वित्तीय घोटाले में उनका नाम घसीटा जाना सही नहीं है। निर्माण कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी जेई और ठेकेदार की होती है। अगर कुछ गड़बड़ हुआ है तो वे दोनों जिम्मेदार माने जाने चाहिए।