जिले में मनरेगा जॉबकार्ड धारकों को 365 दिनों में महज 42 दिन का ही काम मिल सका है। ऐसे में वह अपनी मूलभूत सुविधाएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं। श्रमिकों को काम की तलाश में महानगरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 49 हजार से अधिक श्रमिकों ने रोजी-रोटी की तलाश में या तो गांव छोड़ दिया या फिर निजी कामों में लग गए।
जिले में कुल 1,39,045 जॉबकार्ड धारक हैं। इन कार्ड धारकों के लिए मनरेगा के तहत गांव में विभाग ने काम देना शुरू किया, लेकिन यहां पर विभाग केवल कोरम पूरा करता ही दिखाई दिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 की बात करें तो 89,825 जॉबकार्ड धारकों के लिए 19,77,964 मानव दिवस सृजित हुए।
औसतन देखा जाए तो प्रत्येक श्रमिक को पूरे साल में महज 42 दिन का काम ही मिल सका है। काम न मिलने की वजह से उन्हें अन्य शहरों में रोजगार की तलाश करनी पड़ रही है। वित्तीय वर्ष की बात करें तो 49,220 श्रमिक जनपद छोड़कर रोजी-रोजगार के लिए महानगर चले गए या फिर प्राइवेट में मजदूरी कर रहे हैं।
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शासन के निर्देशों का भी नहीं हो रहा पालन
- मनरेगा जॉबकार्ड धारकों को लेकर शासन की ओर से निर्देश दिया है। इसके तहत प्रत्येक श्रमिक को जिले में कम से कम 100 दिन का काम दिया जाए, लेकिन जिले में शासन के मानक का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस वजह से श्रमिकों का मनरेगा से मोह भंग होता जा रहा है।
मनरेगा योजना में भले ही 100 दिन काम देने की गारंटी दी जाती है, लेकिन यह दावा सिर्फ कागजी है। साल भर में केवल 40 दिन का ही रोजगार मिला है। जो परिवार चलाने के लिए काफी नहीं है।
अरुण कुमार,श्रमिक, तिल्हापुर
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जॉबकार्ड बना हुआ है, साल भर में एक भी दिन काम नहीं मिला। किसी तरह बाहर मजदूरी करके परिवार का गुजारा करना पड़ रहा है।
राघवेंद्र कुमार श्रमिक-तिल्हापुर
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वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों पर एक नजर
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कुल जॉबकार्ड धारक 1,39,045
सक्रिय जॉब कार्डधारक 89,825
कुल सृजित मानव दिवस 19,77,964
औसतन प्रति मजदूर कितने दिन मिला काम 42 दिन
100 दिन का काम पूरा करने वाले मजदूर 3271
वर्जन
मांग के अनुरूप श्रमिकों को काम दिया जा रहा है। पिछले कुछ समय में मांग में कमी देखी गई है। हालांकि शासन की ओर से जो मानव दिवस का लक्ष्य तय किया गया था। जनपद में उससे अधिक काम दिया गया है। -अजीत कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ
अरुण कुमार।
अरुण कुमार।