विकास विभाग के पैसों से जिले के प्रधान और सेक्रेटरियों ने लाखों का खेल कर डाला। बिना किसी शासनादेश के मनमाने तरीके से स्ट्रीट लाइट और डस्टविन के नाम पर राज्य वित्त के खाते से लाखों रुपये निकाले गए। बिना किसी पंजीकृत फर्म से समान खरीदे मनमाना भुगतान किया गया। मामले की जानकारी होने पर जिला पंचायतराज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने सचिवों से जवाब तलब किया है। इसे लेकर विकास विभाग में हड़कंप हैं।
मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह को पता चला कि जिले की तमाम विकास खंड के गांवों में प्रधान और सेक्रेटरी ने सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट और डस्टबिन लगवा लिया है। सामग्री खरीदने के दौरान नेडा द्वारा निर्धारित दर का मानक नहीं लिया गया। इससे ग्राम पंचायतों में धन के गोलमाल की आशंका सामने आ रही है। सीडीओ के निर्देश पर जिला पंचायतराज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने पत्रक बनवाकर जिले भर के पंचायत सचिवों से जवाब मांगा तो हड़कंप मच गया। ग्राम पंचायत में कितनी सोलर लाइट, स्ट्रीट लाइट और डस्टबिन लगवाए हैं।
जिन ग्राम पंचायतों में यह सामग्री लगवाई गई उनकी संख्या कितनी है। उपरोक्त समान किस ग्राम पंचायत में कहां लगा, स्थान के नाम सहित रिपोर्ट। उक्त सामग्री कितने दर से खरीदी गई और किस फर्म से।
डीपीआरओ कार्यालय से मांगी गई सूचना के बाद पंचायत सचिवों में हड़कंप है। वह योजना के मद किए गए बंदरबांट की काट खोजने में लगे हैं। कौशाम्बी विकास खंड के भटवरिया, विदांव, बेरौंचा, कोसम इनाम, सोंधिंया, कायमपुर, रक्सराई, अवाना आलमपुर, चक ऐलई, रसूलपुर, बड़गांव में करीब पांच महीने पहले स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। जिनका भुगतान मनमाने तरीके से किया गया है। मौजूदा समय एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही है। यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि दो महीने पहले डस्टबिन लगवाने के नाम पर पानी की तरफ पैसा बहाया गया।
सोलर व स्ट्रीट लाइट सहित डस्टबिन लगवाए जाने का मामला सामने आया है। सेक्रेटरियों से इस बाबत नोटिस जारी कर कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गोपाल जी ओझा, डीपीआरओ