नगर पंचायत अजुहा में तैनात एक लिपिक के लिए डीएम का आदेश कोई मायने नहीं रखता। चार्ज लेने गए दूसरे लिपिक को उसने यह कहकर मना कर दिया कि मामले में वह नगर अध्यक्ष से बात कर लें।
बताया जाता है कि नगर पंचायत अजुहा में तैनात लिपिक साकेत चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ कस्बे के करन रावत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। करन रावत ने साकेत चंद्र की तैनाती पर ही सवालिया निशान लगाए हैं। तहसील दिवस में शिकायत पर एसडीएम ने जांच कराई तो गड़बड़ी सही पाई गई।
छह सितंबर को तहसील दिवस में शिकायतकर्ता डीएम से मिला तो उन्होंने आरोपी को बुलाकर कहा कि उसके सारे वित्तीय अधिकार छीन लिए गए हैं। डीएम ने लिपिक के वेतन भुगतान पर रोक लगाते हुए कहा कि वह अपना चार्ज नगर पंचायत कार्यालय के लिपिक मान सिंह को दे दें। तीन दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी लिपिक ने डीएम के आदेश का पालन नहीं किया। वहीं जब शुक्रवार को लिपिक मानसिंह ने चार्ज लेने की बात कही तो आरोपी ने यह कहकर लौटा दिया कि वह मामले में अध्यक्ष से बात कर लें।