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अवैध कार्रवाई पर फूटा गुस्सा, हंगामा

Tue, 03 Jan 2017 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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नए साल में जबरन बिना नोटिस दिए मकान व दुकान ढहाए जाने के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय के लोग सड़क पर उतर आए। बाजार बंद कर लोगों ने जमकर हंगामा किया। इसके बाद कलेक्ट्रेट का ढाई घंटे तक घेराव किया। डीएम के न आने पर मंझनपुर चौराहे पर चक्काजाम करने के साथ ही जाम कर बवाल किया। लोग बिना नोटिस दुकान ढहाए जाने का मुआवजा मांग रहे थे। हालात बिगड़ने लगे तो डीएम ने प्रतिनिधि मंडल से कलेक्ट्रेट में बातचीत की। इसके बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे लोगों में गुस्सा बना हुआ है।
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रविवार को नए साल का जश्न मना रहे जिला मुख्यालय के लोगों पर प्रशासन ने अपनी गाज गिराई। अतिक्रमण की आड़ में भूमिधरी भूमि पर बने घर व दुकानों को जेसीबी से ढहवा दिया। इसका लोगों ने विरोध किया तो पुलिस ने लाठी चार्ज किया। हालांकि पुलिस विभाग ने इसको संज्ञान में लेते हुए फोर्स को हटा लिया था। नाले के बाहर बनी दर्जनों दुकानों का जबरन टीन-छप्पर हटाए जाने पर मंझनपुर के लोग सुबह से ही लामबंद होकर चौराहे पर इकट्ठा हो गए। इसके बाद लोग नारेबाजी करते हुए करीब 11 बजे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। डीएम अखंड प्रताप सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) में थे।

बार-बार व्यापारी डीएम को बुलाने की मांग कर रहे थे। व्यापारी कांग्रेसी नेता अंशुल केशरवानी, अधिवक्ता देवेश श्रीवास्तव, पूर्व चेयरमैन नरेश चंद्र केशरवानी, मानवाधिकार एसोसिशन के अध्यक्ष गौतम वर्मा, भाजपा नेता दुर्गेश केशरवानी आदि लोग डीएम को बुलाने की मांग पर अड़ गए। इस दौरान एडीएम, एसडीएम व सीओ सदर से कई बार झड़प भी हुई। डीएम के बाहर न आने पर लोग कलेक्ट्रेट से वापस मंझनपुर चौराहे पहुंचे और चक्काजाम कर दिया। यहां कई बार पुलिस कर्मियों से झड़प हुई। वाजिब मांग होने पर पुलिस कर्मी भी ढीले थे। बिना नोटिस हुई कार्रवाई को लेकर प्रशासन बैकफुट पर था, नतीजतन शाम चार बजे तक जिला मुख्यालय में हंगामा होता रहा। डीएम ने प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन बातचीत का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। इससे लोगों में गुस्सा बरकरार है।
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डीएम से पूछिए क्यों नहीं दी नोटिस
हमें तो पता ही नहीं, दूसरे सर्किल के अफसरों ने की कार्रवाई
मंझनपुर के व्यापारियों ने करीब 12 बजे कलेक्ट्रेट का घेराव कर लिया तो सदर एसडीएम लालजी मिश्र सीओ सदर रमाकांत यादव के कहने पर उनसे बातचीत करने पहुंचे। वार्ता के दौरान ही व्यापारियों ने एसडीएम से पूछा कि आखिर भूमिधरी जमीन पर बने मकान व दुकानों को ढहाने के लिए किसी को नोटिस आपने क्यों नहीं दी तो उनका जवाब यही था कि डीएम से पूछिए। वह तो पूरी कार्रवाई से बाहर थे। इसके बाद लोगों ने एकदम से हंगामा मचाना शुरू कर दिया। मैंने कार्रवाई नहीं की, चायल व सिराथू तहसील के एसडीएम व नायब तहसीलदार को बुलाकर यह कार्रवाई कराई गई है। उनको तो बताया भी नहीं गया था, यह कार्रवाई होनी है। इसके बाद से ही व्यापारियों ने आपा खोया। यही पुलिस अधिकारियों का भी कहना था कि अतिक्रमण हटाने की बात थी। उनको यही पता था कि जिला पंचायत की पटरी व सरकारी भूमि पर कब्जा किए हुए लोगों की अस्थायी दुकानें हटानी हैं। इस तरह की कार्रवाई होनी है, उन्हें बताया ही नहीं गया था। अतिक्रमण के नाम पर जो भी कार्रवाई हुई है, वह दूसरे सर्किल के अफसरों ने की है। उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वह केवल कानून-व्यवस्था के लिए ही तैनात रहे।

जिसने किया विकास, उसी की नोटिस का हवाला
जिला प्रशासन ने मंझनपुर के लोगों के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया है। तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम के कार्यकाल में सड़क चौड़ीकरण के लिए लोगों ने स्वेच्छा से अपनी भूमि दी थी। इसके बाद जिला पंचायत की सड़क को पीडब्ल्यूडी को दे दिया गया। इसका मुआवजा लोगों को मिला नहीं था। लोग मुआवजे की मांग कर रहे ही रहे थे कि इसी सड़क को फोरलेन को दे दिया गया। इसके बाद समदा मार्ग में नाला बनवा दिया गया। नाला के पीछे से लोगों ने अपना निर्माण करवाया। इसके बाद भी लोगों का निर्माण ढहवा दिया गया। नुकसान के मुआवजे की मांग पर अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं।

चायल के नायब तहसीलदार की बदसलूकी से नाराजगी
  रविवार को अतिक्रमण की आड़ में हुई कार्रवाई के लिए लोग चायल के एक नायब तहसीलदार पर भड़के हैं। कस्बावासियों का आरोप है कि चायल से कार्रवाई के लिए बुलाए गए नायब तहसीलदार को जब यही नहीं पता था कि कहां से किसकी भूमि है। स्थानीय कुछ शातिरों के इशारे पर नायब तहसीलदार ने जबरन कार्रवाई कराई और बार-बार वह डीएम के आदेश का हवाला देते रहे। इस दौरान नायब तहसीलदार ने पुलिस कर्मियों व जेसीबी चालक को आदेश देकर मकान व दुकान ढहवाए। सोमवार सुबह हंगामा हुआ तो इसी नायब तहसीलदार के खिलाफ लोगों ने नारेबाजी की। आक्रोशित लोगों का यही कहना था कि बिना लेखपाल व नगर प्रशासन को संज्ञान में लिए नायब तहसीलदार ने क्यों इस तरह की कार्रवाई डीएम के आदेश का हवाला देकर किया।
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