कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे दोआबा के बाशिंदों को आठवें दिन भी राहत नहीं मिली। शुक्रवार को निकली धूप के बाद चली पछुवा हवा से पारा तेजी से लुढ़का। शनिवार की सुबह हवाओं ने गलन बढ़ा दी। इसके बाद दिनभर चला भगवान भाष्कर व बादलों के बीच लुकाछिपी के खेल ने लोगों को अलाव, हीटर, ब्लोवर का सहारा लेने के लिए मजबूर कर दिया। शाम के पांच बजते ही कोहरे का असर जहां दिखाई देने लगा वहीं सड़कों पर सन्नाटा छाने लगा। उधर आठ दिन से पड़ रही कड़ाके की ठंड को लेकर प्रशासन बेखबर है।
31 दिसंबर की शाम से दोआबा पूरी तरह से ठंड की आगोश में है। चार जनवरी तक धूप न निकलने से जिले का जनमानस कांप उठा है। पांच जनवरी से मौसम धीरे-धीरे खुलने लगा। शुक्रवार की सुबह दस बजे से खिली धूप निकली तो शाम तीन बजे तक लोगों को गलन से राहत रही। इसके बाद पछुवा हवाओं के झोंके चलते ही गलन में अचानक इजाफा हो गया। शनिवार की सुबह तो स्थिति और भयावह होने लगी। दिनभर चली हवाओं और सूरज-बादलों के बीच दिन भर चले लुकाछिपी के खेल ने मौसम को और सर्द कर दिया। शाम के तीन बजे के बाद से ही कोहरे का असर धीरे-धीरे शुरू हो गया। मौसम का मिजाज खराब होता देख लोग अपने-अपने घरों की ओर निकलने लगे। हालात ऐसे हुए कि पांच बजते-बजते सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा छाने लगा।
उधर धूप न निकलने से दिनभर लोग घरों, दफ्तरों में अलाव व हीटर, ब्लोअर के सहारे ठंड से बचाव करते रहे। आठ दिनों से ठिठुर रहे जिलेवासियों और सफर करने वाले लोगों के लिए जिले में कहीं भी अलाव का इंतजाम देखने को नहीं मिल रहा। कस्बों, बस और रेलवे स्टेशनों पर अलाव न जलने से लोग ठंड से ठिठुर रहे हैं। प्रशासन द्वारा अलाव का इंतजाम न कराए जाने से लोगों में खासी नाराजगी है। तहसील प्रशासन है कि वह अलाव को लेकर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है।