दो दिन से बदले मौसम के मिजाज ने आम के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। तेज गर्म हवाओं के चलने से फलों के झड़ने का खतरा मंडराने लगा है। दूसरी ओर मौसम आंधी का रूप ले रहा है। ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर आम के उत्पादन पर पड़ेगा। ऐसे में आम आदमी की पहुंच से ‘आम’ दूर हो सकता है। तेज गर्म हवाओं से चलने से केला व दलहनी फसलों को भी नुकसान हो सकता है।
दोआबा में लगभग ढाई सौ हेक्टेयर में आम की बाग है। इन बागों में दशहरी, फजली, चौसा, आम्रपाली आदि किस्म-किस्म की प्रजातियों के आम मौजूद हैं। इन बागों से हर साल किसान को लगभग 14 सौ कुंतल प्रति हेक्टेयर फल प्राप्त होता है। इस साल भी जिले में आम के अच्छे फल आए हैं। बागों में स्वस्थ फल देख बागवान गदगद थे। दो दिनों से बदले मौसम के मिजाज ने आम के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार की सुबह से दिन भर चली धूलभरी गर्म हवाएं सोमवार को भी बंद नहीं हुई। गर्म हवाओं के झटकों से जहां आम पेड़ों से झड़ रहे हैं, वहीं उनके फलों के गिरने का भी खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा आसमान में छा रहा धूल का गुबार तेज आंधी के संकेत भी दे रहा है।
इसे लेकर जिले के बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है। दूसरी ओर मौसम की बेरुखी केले के साथ-साथ उरद, मूंग की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। मौसम का यही हाल रहा तो आम के साथ-साथ केले व उरद-मूंग की पैदावार प्रभावित होना तय है। प्रभारी उद्यान अधिकारी मेवाराम का कहना है कि मौसम की मार से फलों को बचाने के लिए कोई उपाय नहीं है। सबसे अधिक नुकसान किसानों को आंधी से उठाना पड़ता है। तेज आंधी आने से 25 से 40 फीसदी फल तैयार होने से पहले झड़ जाते हैं। इससे बागवानों को लंबा घाटा लग सकता है।