मकर संक्रांति पर्व पर जिले के दो दर्जन गंगा-यमुना घाटों पर भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। कड़ाके की ठंड के बीच शीतलाधाम कड़ा व पभोषा के वार्षिक खिचड़ी मेले में भक्तों का सैलाब भोर से उमड़ पड़ा। पतित पावनी गंगा और यमुना में डुबकी लगाने के बाद भक्तों ने ईष्ट देवताओं का पूजन-अर्चन कर खिचड़ी, गुड़ व तिल का दान देकर पुण्यार्जन किया।
मकर संक्रांति (खिचड़ी) पर्व का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने बेटे मकर राशि के स्वामी शनि के घर जाते हैं। इस दिन सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण प्रवेश भी माना जाता है। मकर राशि के स्वामी और न्याय के देवता भगवान शनि के घर की तरफ सूर्य की गति विशेष शुभदायी होती है। किवदंतियों पर जाएं तो पर्व की मूल घड़ी में स्नान करने पर व्यक्ति को मनचाही मुराद भी मिलती है। इसे लेकर सदियों से पर्व को मनाने की परंपरा है।
शनिवार के दिन पर्व पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। शनिवार को मकर संक्रांति स्नान करने के लिए भक्तों का रेला गंगा और यमुना घाटों की ओर भोर से ही लग गया। शीतलाधाम कड़ा के कुबरी, कालेश्वर, हनुमान, बाजार घाटों पर भोर से ही स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही। गंगा स्नान के बाद भक्तों ने मां शीतला दरबार जाकर माथा टेका और खिचड़ी, तिल, गुड़ आदि का दान देकर पुण्यार्जन किया। इसके अलावा पल्हाना, संदीपन, फतेहपुर आदि गंगा घाटों पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ लगी रही। इसी तरह यमुना के महेवा, कटरी, डेढ़ावल, चांदिकन, गुरौली, बेरौंचा, महिला, भकंदा, कटैया, नंदा का पुरवा उमरवल, तिल्हापुर, ब्यूर सहित दर्जनभर घाटों पर सुबह से ही भीड़ लगने लगी।