घरेलू रसोई गैस होटलों में खप रही है। कामर्शियल सिलेंडर का दुकानदार इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं। ऐसे में एजेंसी संचालकों को चपत लग रही है तो घरेलू उपभोक्ता भी सिलेंडर के लिए परेशान रहते हैं। मगर, आपूर्ति विभाग कोई कार्रवाई ही नहीं कर रहा है। जिसका नतीजा है कि दुकानदारों की मनमानी उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है।
दुकानदारों पर नियम कायदों का कोई असर नहीं है। बाजारों में चाट के ठेलाें, चाय-नाश्ता के होटल और खाने के होटल में घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। ढाबों में भी घरेलू सिलेंडर का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसका नतीजा है कि समय पर घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर मिलने में दिक्कत होती है। घरेलू उपभोक्ता सिलेंडर के लिए चक्कर काटते रहते हैं। जबकि दुकानदार घर पर आने वाले सिलेंडर को दुकान पर इस्तेमाल करता है।
पैसे बचाने के लिए हेराफेरी
सिलेंडर की हेराफेरी पैसे बचाने के लिए की जा रही है। घरेलू सिलेंडर 541 रुपये में मिलता है। जबकि कामर्शियल सिलेंडर 1140 रुपये में। घरेलू सिलेंडर 14 किलो वजन का होता है। जबकि कामर्शियल सिलेंडर 19 किलो का है। कामर्शियल सिलेंडर के एक किलो गैस की कीमत करीब साठ रुपये होती है। जबकि घरेलू सिलेंडर के एक किलो गैस की कीमत 38 रुपये है। ऐसे में कामर्शियल सिलेंडर महंगा पड़ता है। जिसकी वजह से दुकानदार कामर्शियल सिलेंडर नहीं खरीदते हैं।