फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ताड़का वध होते ही लगे प्रभुराम के जयकारे

विज्ञापन
Lord Ram praises as soon as Tadka is killed - फोटो : KAUSHAMBI
विज्ञापन
ताड़का वध होते ही लगे प्रभु राम के जयकारे
विज्ञापन

सरायअकिल की रामलीला में चौथे दिन मुनि आगमन, ताड़का वध व फुलवारी लीला का हुआ मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल। कस्बा की रामलीला में चौथे दिन गुरुवार की रात मुनि आगमन, ताड़का वध व फुलवारी लीला का मंचन किया गया। रामलीला में फतेहपुर से आए कलाकारों की सशक्त प्रस्तुतियां देख दर्शक मुग्ध हो गए।
सरायअकिल में 14 दिवसीय रामलीला का मंचन चल रहा है। लीला प्रसंगों के मुुुताबिक चौथे दिन धर्म की रक्षा के लिए भगवान राम ने ताड़का का वध किया। कथानक के अनुसार ताड़का नाम की राक्षसी सुकेतु यक्ष की पुत्री थीं जिसका विवाह सुड नामक राक्षस से हुआ था। यह अयोध्या के समीप ही सुंदर वन में अपने पति और दो पुत्रों सुबाहू और मारीच के साथ रहती थीं। ताड़का के पास हजार हाथियों के बराबर बल था। उसके तांडव से ही सुंदर वन का नाम ताड़का वन पड़ गया था। महर्षि विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि. मुनि इन राक्षसों के तांडव से परेशान थे और यज्ञ, जप, तप आदि धार्मिक कार्य करने में परेशान करते थे। महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से अनुरोध कर भगवान राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन लाए। भगवान राम ने ताड़का समेत सुबाहू का वध कर धर्म की रक्षा की। दर्शकों नें जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारा लगाया। इस दौरान कमेटी के संरक्षक व चेयरमैन शिवदानी, कृष्ण नारायन रस्तोगी, कमेटी के अध्यक्ष गोपाल जी केशरवानी, कोषाध्यक्ष शंकरलाल, महामंत्री अनिल केशरवानी, संतोष कुमार सोनी समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

राम के वन जाते ही उड़ गए दशरथ के प्राण पखेरू
म्योहर। म्योहर गांव में रामलीला के चौथे दिन कोपभवन, राम वनगमन, राम-केवट संवाद का मंचन किया गया। लीला प्रसंगों के मुताबिक राजा दशरथ ने जैसे ही राम के राज्याभिषेक की घोषणा किया वैसे ही मंथरा कैकेई को भड़काने पहुंच गई। देवासुर संग्राम के दौरान दशरथ द्वारा दिए गए दो वरदानों को मांगने के लिए उकसाती है। मंथरा के बहकावे में आकर ने दो वरदान के रूप में भरत को राजगद्दी और राम को चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया। पिता के वचनों के लिए राम लक्ष्मण सीता वन को चले जाते है। इधर पुत्र वियोग में राजा दशरथ की मौत हो जाती है। रास्ते में राम और निषाद राज से मुलाकात होती है। नदी पार करने के लिए केवट से राम निवेदन करते है तो वह प्रभु के चरणों मे जादू होने की बात कहता है और कहता है कि आपके चरण स्पर्श से शिला नारी बन गई तो मेरी काठ की नाव का क्या होगा? नदी पार हो पर उतराई देने पर केवट प्रभु से भवसागर पार कराने की बात कहता है। प्रभु राम केवट को भवसागर पार होने का आशीर्वाद देते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें