सरसवां ब्लॉक के भगवतपुर गांव में विकास के नाम पर लंबा खेल हुआ है। इसकी शिकायत भी हुई, लेकिन प्रधान के पति के प्रभाव के कारण शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई। अभिलेखीय साक्ष्य के बावजूद मामला दबा दिया गया। अब डीएम के निर्देश के बाद डीपीआरओ ने सचिव से दस्तावेज तलब किए हैं।
भगवतपुर गांव में 2021 में ग्राम प्रधान मंजू देवी हैं। लेकिन ब्लॉक की बैठक से लेकर जिले के विभिन्न कार्यालयों में प्रधान के पति राज भूषण द्विवेदी का ही दखल रहता है। इनके कार्यकाल में तकरीबन 50 लाख रुपये के लागत से विकास कार्य कराए गए। ग्रामीणों ने इसमें अनियमितता की शिकायत बीडीओ से लेकर डीएम और सीएम कार्यालय तक की। कार्यों की जांच के लिए मुख्यालय में धरना प्रदर्शन तक किया, लेकिन प्रधान के कार्यों की जांच के नाम पर केवल कोरम पूरा हुआ। कॉलेज छात्राओं से छेड़खानी की घटना के बाद डीएम मधुसूदन हुल्गी ने शनिवार को गांव में हुए विकास कार्यों की जांच कराने का निर्देश डीपीआरओ को दिया। इसके बाद पंचायती राज विभाग सक्रिय हो गया। सचिव शशांक सिंह ने बताया कि गांव में हुए विकास कार्यों के दस्तावेज डीपीआरओ कार्यालय में मांगे गए हैं। मंगलवार को वह दस्तावेज डीपीआरओ कार्यालय में देंगे। दावा किया कि उनके कार्यकाल में गांव में काम नहीं हुए हैं।
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यहां हुआ फर्जी भुगतान
शिकायत कर्ता प्रकाश दुबे ने बताया कि गांव में तत्कालीन सचिव दूधनाथ पटेल के साथ मिलकर प्रधान पति ने फर्जी तरीके से हैंडपंप मरम्मत कराए बिना एक- एक हैंडपंप का कई बार नाम बदल-बदल कर भुगतान निकाला। पंचायत भवन की दीवार का एक हिस्सा तोड़कर इसके बाद रिपेयरिंग के नाम पर चार लाख का भुगतान निकाला गया। स्कूल की रंगाई पोताई प्रधानाध्यापक ने कराई, लेकिन इसका भुगतान ग्राम पंचायत से निकाला गया। इसी प्रकार प्रधान ने अपने देवर के खाते में मनरेगा के आठ लाख का भुगतान कर दिया। इस पर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।