नगर पंचायत अजुहा में मोक्षधाम में हाईमास्ट लगाने को लेकर सवार खड़े होने लगे हैं। हाईमास्ट पर सात लाख रुपये खर्च किया जा रहा है। ऐसे में लोगों का कहना है कि मोक्षधाम में रोशनी के लिए इतनी बड़ी रकम की बर्बादी रोकी क्यों नहीं जा रही है।
नगर पंचायत अजुहा में विकास के नाम पर किस तरह की अंधेरगर्दी हो रही है, इसका जीता-जागता उदाहरण मोक्षधाम बन गया है। बताते हैं कि इसके पुनर्निर्माण के लिए शासन ने एक करोड़ 12 लाख रुपये आवंटित किया है। पर, सरकारी धन सदुपयोग होने के बजाए लूट का जरिया बन गया है। शिकायत है कि बिना काम कराए 60 लाख रुपये निकाल लिए गए। एडीएम के मुआयना में धांधली उजागर होने के बाद मोक्षधाम में युद्ध स्तर पर काम शुरू करा अनियमितता पर परदा डालने की कोशिश हो रही है। स्थानीय नागरिक मोक्षधाम को विकसित किए जाने के तो पक्षधर हैं।
पर, विकास के नाम पर हो रहे सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर असंतुष्ट हैं। लोगों का सवाल है कि मोक्षधाम में हाईमास्ट लगाने की क्या जरूरत है। तकरीबन सात लाख रुपये की लागत से लगने वाले हाईमास्ट को नगर के पॉश इलाके में स्थापित किया जा सकता था। इस बारे में नगर की चेयरपर्सन शांति कुशवाहा का कहना है कि मोक्षधाम में हाईमास्ट लगाने का फैसला उनका अकेला नहीं है। बल्कि सदन की बैठक में सर्व सम्मति से लिया गया फैसला है।