Kaushambi : कौशांबी महोत्सव में रामकथा सुनाते कवि कुमार विश्वास।
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राम कथा मर्मज्ञ डॉ. कुमार विश्वास ने कौशाम्बी महोत्सव के आखिरी दिन रविवार को भगवान राम के लंका विजय की कथा का वर्णन किया। भावपूर्ण कथा सुन श्रोताओं की आंखें भर आईं। लोग भगवान राम के उस अतीत को सोचने के लिए मजबूर हुए जिसके तहत उन्होंने समाज में आदर्श स्थापित करने के लिए खुद को समर्पित किया।
डॉ. विश्वास ने बताया कि राम-कथा पारिवारिक-मूल्यों की एक अद्भुत पाठशाला है। ऐसे समय में जब पूरा विश्व भारत की सांस्कृतिक विशिष्टता का आधार परिवार नामक संस्था पर हमला करने के लिए पूरी शक्ति के साथ विविध चेष्टाओं में उलझा पड़ा है, उस मुश्किल समय में राम-कथा का श्रवण और मनन और भी प्रासंगिक हो उठता है।
बताया कि राम कथा व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाती है। भगवान राम सीता की खोज करते हुए समाज में ऊंच-नीच का भेद-भाव मिटाने के लिए भीलनी सबरी के आश्रम पहुंचे और उसके जूठे बेर खाए। कहा कि भगवान का पृथ्वी पर आना उनकी लीला का इतिहास मात्र है। भगवान तो एक हैं, वह अलग-अलग रूपों में आते हैं। एक बार कन्हैया जी ने गोस्वामी तुलसीदास को दर्शन दिए कहा कि हमेशा राम-राम जपो। जो लिखो राम पर लिखो। कभी मुझ पर भी कुछ लिख दिया करो। इस पर गोस्वामी जी ने कन्हैया से कहा लिख दूंगा लेकिन बस आप मुरली छोड़कर कंधे पर धनुष धारण कर लें।