जिले की आधी भूमि पर बोई जाने वाली फसलों को जीवनदान देनी वाली किशुनपुर पंप कैनाल की माइनरें इन दिनों दगा दे रही हैं। धान की पिछड़ी फसलों, आलू की सिंचाई और गेहूं पलेवा के लिए माइनरों में बूंद भर पानी नहीं है। इसका कारण पंप कैनाल का एक ट्रांसफार्मर का फुंकना बताया जा रहा है। बिजली के अभाव में महज चार पंप ही पानी उगल रहे हैं। उधर अफसर मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
फतेहपुर जनपद के किशुनपुर यमुना नदी से निकली पंप कैनाल की माइनरों और रजबहों का कौशांबी में मकड़जाल है। 28 माइनरों और छह रजबहों के जरिए जिले की दस हजार एकड़ भूमि पर बोई जानी वाली फसलों की सिंचाई इससे की जाती है। इस साल मौसम अच्छा होने पर किसानों ने धान की रोपाई बड़े पैमाने पर कर रखी है। इसमें धान की कुछ पिछड़ी फसलें अभी अधपकी हैं। बारिश बंद होने के बाद सिंचाई के ऐन वक्त पर किशुनपुर पंप कैनाल ने भी दगा दे दिया है।
कैनाल में लगे दो ट्रांसफार्मरों में एक पखवारे भर पहले फुंक गया। ट्रांसफार्मर के फुंकते ही कैनाल के तीन पंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया। इससे नहर का पानी कौशाम्बी के बार्डर तक पहुंचकर ठहर सा गया है। पानी के अभाव में दस दिन से सभी माइनरों और रजबहों से धूल उड़ने लगी है। उधर तेज धूप होने से धान की फसलें भी पानी के अभाव में नष्ट होने लगी है। दूसरी ओर खेतों में लगाए जा रहे आलू की सिंचाई भी सही समय पर नहीं हो पा रही है। इसके अलावा गेहूं की बुवाई के लिए खेतों का पलेवा भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में नहर से गायब हुए पानी ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। सिंचाई और पलेवा के ऐन वक्त पर माइनरों से पानी गायब होने के लेकर किसान हैरान-परेशान है।
सब्जियों की खेती पर भी पड़ रहा बुरा असर
किशुनपुर पंप कैनाल की माइनरों और रजबहों के किनारे स्थित खेतों में किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती करते हैं। मौजूदा समय में पालक, भिंडी, बैंगन, फूल गोभी, बंद गोभी के बीजों की खेतों में रोपाई होनी है, लेकिन माइनरों व रजबहों से पानी गायब होने की वजह से सब्जियों की खेती पिछड़ रही है। इसके अलावा जिन किसानों ने खेतों में नर्सरी की रोपाई और बीजों की बुवाई कर भी लिया है उनकी सब्जियों की फसल सिंचाई के अभाव में नष्ट हो रही है।
ऐन वक्त पर दगा क्यों देती है नहर
किशुनपुर पंप कैनाल जिले के किसानों को अर्से से ऐन वक्त पर दगा देती आ रही है। लगभग दस साल से नहर में धान की रोपाई, गेहूं के पलेवा के समय पानी नहीं रहता। इसके चलते नहरी क्षेत्र के किसानों को कठिनाई के दौर से गुजरना पड़ता है। बेरौंचा के किसान बलई पयासी का कहना है कि बेरौंचा माइनर किसानों को ऐन वक्त पर दगा देती है। माइनर में पानी दिसंबर और जनवरी में दिखता है। इसके बाद फिर माइनर में लगातार धूल ही उड़ती रहती है।
कैनाल में सात पंप चलने पर भरपूर पानी निकलता है। पखवारे भर से ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण चार पंप ही चल रहे हैं। ट्रांसफार्मर बदलते ही सभी पंप चालू कराते हुए समस्या दूर कर दी जाएगी।
आरके निरंजन, एक्सईएन सिंचाई