मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों के गम में किसानों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को भी सदमे में सिराथू तहसील के सौरई बुजुर्ग गांव के किसान बांकेलाल पटेल (50) और रामलाल (62) की कुछ घंटे के अंतराल में मौत हो गई। दोनों किसानों ने एक दिन पहले ही गेहूं फसल की मड़ाई कराई थी। बताया जाता है कि 10 फीसदी भी पैदावार नहीं होने का सदमा दोनों किसान बर्दाश्त नहीं कर सके। एसडीएम सिराथू जवाहरलाल ने बताया कि किसानों की मौत की सूचना मिली है। जांच कराई जा रही है।
मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं समेत सभी फसलें बर्बाद हो गई हैं। खेतों में गिरकर तबाह हुई फसलों से मड़ाई के बाद अनाज ही नहीं निकल रहा है। इस सदमे से जिले में लगातार किसानों का दम टूट रहा है। मंगलवार भोर भी बर्बाद हुई फसल के सदमे से सिराथू तहसील के सौरई बुजुर्ग गांव के किसान बांकेलाल पटेल (50) की मौत हो गई। पत्नी सुकुंती देवी ने बताया कि 4 बीघा खेत गांव के ही एक काश्तकार से बंटाई पर लिया था। खेती से ही परिवार के निवाले का इंतजाम और अन्य खर्च चलता था। बेमौसम हुई बारिश में गिरकर पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। फिर भी उम्मीद थी कि खाने भर को मिल जाएगा। पर, सोमवार को हुई मड़ाई में 4 बोरा भी अनाज नहीं निकला। कम पैदावार होने से पति परेशान हो गए थे।
उन्हें चिंता सताने लगी कि काश्तकार का पैसा कहां से देंगे। सुकुंती देवी का मानना है कि इसी सदमे में उनके पति की रात अचानक तबीयत बिगड़ी और भोर में सांसें थम गईं। इसी गांव के रहने वाले किसान रामलाल (62) की भी मंगलवार दोपहर मौत हो गई। उसके बेटे ने बताया कि कुल दो बीघा खेत है। पहले पूरे खेत में आलू की बुआई की गई थी। जो बार-बार की बारिश में सड़ गया। बाद में गेहूं की खेती की गई। यह फसल भी मौसम की भेंट चढ़ गई। बताया कि मंगलवार की सुबह मड़ाई करने पर डेढ़ कुंतल से भी कम गेहूं निकला। यह देख उसके पिता की तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल ले जाते इससे पहले ही दम निकल चुका था। कुछ घंटे के भीतर गांव के दो किसानों की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा है।