भाजपा के शीर्ष नेताओं में शामिल केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनते ही कौशाम्बी के बाशिंदों की उम्मीदें हिलोरे मारने लगी हैं। आम से खास तक ने विकास के सब्जबाग देखना शुरू कर दिया है। अब देखना यह है कि केशव विकास की बांसुरी बजाएंगे तो कौशाम्बी उसमें कितना मदमस्त होता है। अर्से से चली आ रही ट्रामा सेंटर बनाने की मांग साकार रूप लेगी? पर्यटन स्थल नए अवतार में दिखेंगे और बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए उद्योगों की स्थापना होगी या नहीं। हालांकि केशव ने जिले के विकास के लिए जो दावे किए थे, उनमें यह सब शामिल है। इससे लोगों की आस बंध गई है कि यह सब कौशाम्बी में होना लगभग तय है।
जिले की स्वास्थ्य सेवा धड़ाम है। जिला अस्पताल में सर्दी, जुकाम, बुखार और महिलाओं की डिलेवरी के अलावा गंभीर रोगों का इलाज नहीं होता है। यह अस्पताल रेफर अस्पताल के नाम से जाना जाता है। गंभीर केस देखते ही डॉक्टर उसका इलाज कम और रेफर का कागजात तैयार कराने में जल्दी जुट जाते हैं। डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय सब मनमाने तरीके से काम करते हैं। परसरा व मखऊपुर औद्योगिक आस्थान दशकों से वीरान है। उद्योग बंधु की हर माह मीटिंग होती है। कागजों पर उद्योग स्थापित करने के लिए तमाम प्रस्ताव आए और शासन को गए, लेकिन एक भी उद्योग स्थापित नहीं हो सका। ये बात दूसरी है कि उद्योगों के संचालन के लिए बैंक से कर्ज जरूर ले लिया गया। जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की रही। किशनपुर पंप कैनाल के अधिकारी अपनी मर्जी से पानी छोड़ते रहे हैं।
नहर की सफाई कागज में होती रही है, जबकि किसान इसकी मुखालफत भी करते रहे। इसके अलावा जिले की शिक्षा गुणवत्ता पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। नकल के लिए कुख्यात कौशाम्बी की तस्वीर बदलेगी। इस तरह के अनगिनत सवालों में उलझी कौशाम्बी की जनता को विकास की किरण रविवार से दिखाई पड़ने लगी है। जिले के लोगों का मानना है कि केशव के डिप्टी सीएम बनने से विकास होगा। हर वह समस्या का निदान होगा, जिससे अब तक यह जूझ रहा था। शिक्षा, चिकित्सा में सुधार होने की उम्मीद है तो पर्यटन स्थलों के जरिए रोजगार की संभावनाएं भी तलाशी जाने की संभावना दिखने लगी है।