फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

10 दिन में चार्जशीट, 137 दिन में फैसला

विज्ञापन
विज्ञापन
मंझनपुर। सामूहिक दुष्कर्म की इस घटना ने पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया था। कानून व्यवस्था के साथ महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे थे। विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी थी। नतीजा रहा कि पुलिस ने जरा भी ढिलाई नहीं बरती। दस दिन में चर्जशीट दाखिल की गई और अदालत से समन्वय स्थापित करके 137 दिन में दोषियों को सजा दिला दी गई। कोर्ट ने दरिंदों को विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग सजा सुनाने के साथ ही अलग-अलग जुर्माना भी लगाया।
विज्ञापन

अदालती फैसला आने के बाद बुधवार शाम एसपी अभिनंदन ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता की। बताया कि दरिंदों ने कानूनी-दांव पेंच फंसा दिया था। वरना निर्णय 90 दिन के भीतर ही आ जाता। उन्होंने आरोपियों पर रासुका की कार्रवाई किए जाने का भी जिक्र किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कृपाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि आईपीसी की धारा 376 (2) में 15 वर्ष कारावास 20 हजार रुपये का अर्थदंड, 376 डी एवं एससीएसटी अधिनियम में आजीवन कारावास व 50 हजार रुपया जुर्माना, 354 ग में दो वर्ष कारावास, दो हजार जुर्माना, 506 में दो वर्ष कारावास दो हजार जुर्माना, 286 में छह माह कारावास और एक हजार अर्थदंड, पाक्सो एक्ट में आजीवन कारावास 50 हजार जुर्माना, 3(1) द एससीएसटी अधिनियम में तीन वर्ष कारावास तीन हजार अर्थदंड, 3(1) ब एससीएसटी अधिनियम में तीन वर्ष कारावास, तीन हजार जुर्माना, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत छह माह कारावास, दो हजार अर्थदंड और धारा 67 क आईटी एक्ट में दो वर्ष कारावास 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। मुकदमे की विवेचना सीओ मंझनपुर सच्चिदानंद पाठक कर रहे थे। क्योंकि उस वक्त चायल सर्किल में कोई डीएसपी नहीं था। मॉनीटरिंग तत्कालीन एसपी प्रदीप गुप्ता और एससपी अशोक कुमार ने की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें