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Kaushambi : रामबाबू मौत प्रकरण में गरमाई सियासत, दो धड़ों में बंटे सियासी, सोशल मीडिया पर छाया मामला

Sun, 08 Jun 2025 07:36 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी

सार

चर्चित रामबाबू मौत प्रकरण ने सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है। बालिका से दुष्कर्म के मुकदमे के बाद रामबाबू की मौत ने सियासी दलों को दो धड़ों में बांट दिया है। कोई दुष्कर्म पीड़िता के साथ खड़ा नजर आ रहा है तो तमाम लोग मृतक पक्ष के साथ हैं।
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रामबाबू तिवारी की मौत के बाद चक्काजम करते ग्रामीण। - फोटो : संवाद।
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विस्तार
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चर्चित रामबाबू मौत प्रकरण ने सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है। बालिका से दुष्कर्म के मुकदमे के बाद रामबाबू की मौत ने सियासी दलों को दो धड़ों में बांट दिया है। कोई दुष्कर्म पीड़िता के साथ खड़ा नजर आ रहा है तो तमाम लोग मृतक पक्ष के साथ हैं। सोशल मीडिया के जरिये राजनीतिज्ञों का दोनों धड़ा पुलिसिया कार्रवाई पर ही सवाल खड़ा कर रहा है।

लोंहदा गांव की आठ वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म का आरोप रामबाबू तिवारी के बेटे सिद्धार्थ पर लगाया गया। पुलिस ने सिद्धार्थ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। सप्ताह भर बाद रामबाबू ने सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने आरोपी प्रधान भूप नारायण सहित पांच लोगों पर केस दर्ज किया। दुष्कर्म पीड़िता के पिता सहित दो लोगों को पुलिस ने दूसरे दिन ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिसिया लाठीचार्ज और मृतक के बेटे को फर्जी मुकदमें में फंसाए जाने का मामला सुर्खियां बना तो सियासत गरमा गई।

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सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कही तो रविवार को सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल का बयान भी सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें उन्होंने दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने और उसके पिता की गिरफ्तारी की निंदा की। मृतक पक्ष से सपा विधायक पल्लवी पटेल, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, भाजपा की पूर्व जिलाध्यक्ष अनीता त्रिपाठी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष गौरव पांडेय, हिंदू संगठन नेता अवधेश नारायण, वेद प्रकाश पांडेय, सपा नेता शशिभूषण द्विवेदी, सपा विधायक पल्लवी पटेल सहित ब्राह्मण समाज के लोग खड़े नजर आ रहे हैं। दोनों धड़ों में शामिल समाजसेवी व नेता पुलिस की कार्रवाई पर उंगली उठा रहे हैं। कोई दुष्कर्म पीड़िता को न्याय से वंचित रखने की बात कर रहा है तो कोई दिवंगत रामबाबू के परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग कर रहा है।


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लोंहदा गांव पहुंचे थानाध्यक्ष कड़ाधाम, बच्चों का लिया बयान

चर्चित किसान रामबाबू की मौत मामले में दो दरोगाओं के निलंबन व थानाध्यक्ष के लाइन हाजिर होने के बाद दुष्कर्म प्रकरण की फिर से जांच शुरू कर दी गई है। एसपी के निर्देश पर जांच कर रहे कड़ाधाम कोतवाल धीरेंद्र सिंह ने रविवार को लोंहदा गांव पहुंच पांच बच्चों का बयान दर्ज किया।

सैनी कोतवाली के लोंहदा गांव में रामबाबू तिवारी की चार जून को जहर खाने से मौत हो गई थी। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में रामबाबू ने बेटे सिद्धार्थ को दुष्कर्म के फर्जी आरोप में जेल भेजे जाने के पीछे ग्राम प्रधान भूप नारायण पाल व उसके सहयोगियों को दोषी ठहराया। बड़े बेटे अक्षय की तहरीर पर पुलिस ने प्रधान सहित पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

दुष्कर्म पीड़िता के पिता सहित दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जबकि, प्रधान व उसके भाई सहित तीन लोग अभी भी फरार हैं। इसे लेकर परिजन व ग्रामीणों ने दूसरे दिन हाईवे पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। प्रदर्शन करने वाले सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष सहित 10 नामजद व 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

सोशल मीडिया के जरिए मामला सुर्खियों में आया तो सियासत गरमा गई। मृतक की पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर इन्साफ मांगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रमुख सचिव गृह को जांच के निर्देश दिए। घटना को लेकर आए भूचाल के चलते एसपी राजेश कुमार ने शनिवार की देर रात थानाध्यक्ष सैनी बृजेश करवरिया को लाइन हाजिर करते हुए पथरावां चौकी इंचार्ज आलोक राय व विवेचक को निलंबित कर दिया। दुष्कर्म प्रकरण की जांच थानाध्यक्ष कड़ाधाम को सौंपी गई।

रविवार को थानाध्यक्ष घटना की जांच करने लोंहदा गांव पहुंचे। ग्रामीणों से पूछताछ किया तो पता चला कि 27 मई को मृतक रामबाबू के भाई अनिल तिवारी के यहां रामायण कार्यक्रम था। उसमें चार-पांच बच्चों के साथ आठ वर्षीय बालिका भी प्रसाद लेने पहुंची थी। इसके बाद थानाध्यक्ष ने उन चार-पांच बच्चों के घर पहुंचकर गोपनीय तरीके से बयान भी दर्ज किया।

दुष्कर्म पीड़िता का पहले ही कलमबंद बयान किया जा चुका है। इसके अलावा घटना में कितनी सच्चाई है, इसकी जांच के लिए थानाध्यक्ष कड़ाधाम को निर्देशित किया गया है। जांच में अब तक यही पता चल सका है कि विपक्षी प्रधान से मृत रामबाबू का चुनावी रंजिश के अलावा छह माह पहले जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद चला आ रहा है। कई लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा। - राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक।

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अक्षय ने पलटा अतीत का पन्ना, बोला...तीन दशक से चली आ रही रंजिश

सैनी के लोंहदा गांव में मौत का शिकार हुए रामबाबू से आरोपी ग्राम प्रधान भूप नारायण की दुश्मनी तीन दशक से चली आ रही है। चुनाव में जीत-हार और जमीन पर कब्जा से लेकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए दोनों पक्ष वर्षों से जद्दोजहद करते रहे। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब गांव पहुंची तो मृत रामबाबू के बेटे अक्षय ने अतीत के पन्नों को पलटते हुए कहानी बयां की।

दोपहर 12 बजे गांव पहुंची टीम को मृतक रामबाबू के मोहल्ले में सन्नाटा नजर आया। घर पर कुछ हिंदू संगठन के सदस्य बैठकर परिजन से बातचीत कर रहे थे। वह परिवार को न्याय का भरोसा दिलाते हुए हर संभव मदद का ढांढस बंधा रहे थे। इसके अलावा पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते नजर आए। 50 मीटर की दूरी पर कुछ पुलिस कर्मी बैठे हुए थे। पिता की मौत पर दाग दिए बैठे अक्षय तिवारी से पूछा गया तो उसने बताया कि ग्राम प्रधान भूप नारायण पाल से उनकी तीन दशक पहले से रंजिश चली आ रही है।

वर्ष 1980 से 1995 में अक्षय के बाबा रामलखन तिवारी ग्राम प्रधान थे। हर चुनाव में विपक्ष से भूप नारायण पाल का परिवार ही खड़ा रहता था। वर्ष 2010 में रामबाबू के भाई अनिल तिवारी क्षेत्र पंचायत सदस्य चुने गए। इस बार भी भूप नारायण पाल को हार नसीब हुई। अनिल तिवारी की पत्नी उमा देवी 10 वर्ष तक साधन सहकारी समिति लोंहदा की अध्यक्ष चुनी गईं। इसमें भी भूप नारायण पाल की एक न चली। सात माह पहले रामबाबू की जमीन पर प्रधान ने कब्जा करने की नीयत से नींव डलवा दी। शिकायत पर राजस्व कर्मियों ने पैमाइश की तो प्रधान का अवैध कब्जा ढहवाया।

 

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