मौसम की मार से तबाह हुए दोआबा के किसान मुख्यमंत्री से अपना दर्द बयां नहीं कर सके। बुधवार को मुख्यमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पीड़ित किसानों से बातचीत करने वाले थे। इसके लिए सुबह 10 से अपराह्न 3 बजे तक कलेक्ट्रेट के एनआईसी दफ्तर में स्क्रीन पर टकटकी लगाए किसान बैठे रहे। पर, वीडियो कांफ्रेसिंग में दोआबा का नंबर ही नहीं आया। इससे दोआबा के दूर दराज के गांवों से मुख्यमंत्री को अपनी समस्या बताने आए किसानों को मायूस लौटना पड़ा। इससे अफसरों ने राहत की सांस ली। पर, मुख्यमंत्री से बोल नहीं पाने से अन्नदाता नाराज रहे।
मुख्यमंत्री से किसानों की बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग थी। इसके लिए कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी दफ्तर में सुबह 10 बजे ही जिले की तीनों तहसीलों मंझनपुर, सिराथू और चायल के एसडीएम अपने-अपने क्षेत्र के दो-दो दर्जन किसानों को लेकर पहुंच गए थे। डीएम, सीडीओ के साथ तीनों एसडीएम किसानों को लेकर 10 से अपराह्न 3 बजे तक कांफ्रेंस हाल में स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे रहे। पर, इस बीच जहां कौशाम्बी में मौसम की मार से हुई फसलों की बर्बादी का जिक्र ही नहीं आया वहीं मुख्यमंत्री भी सिर्फ पांच मिनट के लिए ही स्क्रीन पर दिखे। इस दौरान भी उन्होंने दोआबा के एक भी किसान से बात नहीं की। अपराह्न 3 बजे जब कांफ्रेसिंग का समय खत्म हो गया तो डीएम समेत सभी अफसरों ने राहत की सांस ली। पर, मुख्यमंत्री से बोलने, उनके सामने मौसम की मार से बर्बाद हुई फसलों का दर्द किसान बयां नहीं कर सके। इसके अन्नदाताओं में गुस्सा भी रहा। बता दें कि मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने जिले के करीब 1.50 लाख किसानों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा कर दिया।
सीएम के वीडियो कांफ्रेंसिंग कार्यक्रम में किसानों को सिखा पढ़ाकर लाया गया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद बातचीत के दौरान उमरवल गांव के किसान फुर्तीलाल और पंछीलाल ने बताया कि उन्हें तो सिर्फ यह कहकर लेखपाल लेकर आए थे कि टीवी पर मुख्यमंत्री कुछ भी पूछे तो बस इतना बताना कि गांव में कैंप लगा था। मुआवजे का चेक मिल चुका है। वहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए मंझनपुर आए सिराथू तहसील क्षेत्र के हटवा गांव के किसान पंकज चौधरी, रमेश चंद्र, जदवीपुर के इंद्रजीत, चकनारा के रामगुलाम आदि तमाम किसान मुख्यमंत्री से दर्द नहीं बयां करने से खफा दिखे। इन किसानों का कहना था कि यदि मुख्यमंत्री को उनसे उनकी समस्या नहीं पूछनी थी तो उन्हें यहां बुलाया ही क्यों गया था?