वसंत पंचमी के मौके पर शनिवार को स्कूलों में ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। किड्जी समेत जनपद के विभिन्न स्कूलों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जहां बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया। वहीं प्रिंसिपल, अध्यापकों ने बच्चों को वसंत पंचमी के धार्मिक महत्व और प्रकृति से जुड़े इस पर्व के बारे में अहम जानकारी दी।
ज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती के पूजन का पर्व वसंत पंचमी शनिवार को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। किड्जी स्कूल भरवारी में एनडी ग्रुप आफ एजुकेशन के चेयरमैन संजय गुप्ता ने बच्चों, शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति में ज्ञान की देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और हवन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को वसंत पंचमी को प्रकृति का पर्व बताते हुए पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प दिलाया। कहा कि देश में जितने भी त्योहार हैं। इनके माध्यम से प्रकृति के संरक्षण की शिक्षा मिलती है।
इसे अमल में लाने की जरूरत है, तभी खुशहाल जीवन संभव है। वसंत पंचमी पर एसडी उच्चतर माध्यमिक स्कूल चाकवन में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्कूल की छात्रा शिवानी, संध्या, सोनम, प्रियंका, पूजा, आशा, पिंकी आदि ने नृत्य, गीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से जहां अपने हुनर का प्रदर्शन किया। वहीं कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्कूल के अध्यक्ष अशर्फीलाल यादव ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना की। इस मौके पर प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद यादव, प्रधानाचार्य आर सहाय, अजीत कुमार, श्याम राजपूत, संजय सिंह, दयाशंकर पांडेय, रूपा देवी, खुशबू देवी, नीलम देवी, माया देवी, सावित्री देवी, मनीषा देवी आदि मौजूद रहीं।
गंगा में डुबकी लगाकर लोगों ने कमाया पुण्य
कड़ा (ब्यूरो)। वसंत पंचमी के पर्व पर शनिवार को कौशाम्बी के कड़ा, कालेश्वर, शहजादपुर, संदीपन, फतेहपुर समेत सभी घाटों पर दिनभर स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही। भोर से ही गंगा में डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शाम तक चलता रहा। सुबह से ही हर-हर गंगे का जयघोष करते हुए स्नानर्थियों की भीड़ गंगाघाटों पर जुटने लगी थी। लोगों ने गंगा में स्नान करके दान-दक्षिणा देकर पुण्य कमाया। सबसे ज्यादा भीड़ कड़ा के कुबरी और कालेश्वर घाट पर रही। जहां कौशाम्बी के अलावा आसपास के जनपदों से भी स्नानार्थियों की भीड़ आई थी। यहां लोगों ने गंगा में स्नान करके पुण्य कमाने के साथ ही सिद्धपीठ मां शीतला के दरबार में भी हाजिरी लगी। मां शीतला की विधि विधान से पूजा करके लोगों ने घर-परिवार की सुख-समृद्धि और सलामती की कामना की। वसंत पंचमी पर दिनभर देवीधाम मैया के जयकारों से गुंजायमान रहा।