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फौव्वारा सिंचाई के नाम पर खेल

Sun, 19 Apr 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
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मंझनपुर। औद्यानिक मिशन योजनाएं मनमानी की भेंट चढ़ गई हैं। ऐसी ही मनमानी का खेल फौव्वारा सिंचाई अपनाने को मिलने वाले अनुदान में भी हुआ है। आवेदक किसानों को अब तक सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर पाइप ही नहीं मुहैया कराई जा सकी है।
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भूजलस्तर गिरने से कौशाम्बी में सिंचाई के पानी की समस्या गहराने लगी है। आलम यह है कि जिले के चायल, नेवादा, मूरतगंज आदि ब्लाकों में गहरी बोरिंग पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं भूजलस्तर नीचे गिरने से गहराई पानी की समस्या से निपटने के लिए फसलों की सिंचाई में टपक और फौव्वारा विधि अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। सिंचाई की इन विधियों को अपनाने के लिए किसानों को विभाग की ओर से अनुदान भी मिलता है। देखें तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में फौव्वारा सिंचाई के लिए किसानों को अनुदान देने के लिए 18 लाख रुपये की राशि विभाग को उपलब्ध कराई गई थी। इसके लिए जिले के 50 किसानों ने आवेदन किया था।

पर, ज्यादातर किसान फौव्वारा सिंचाई के लिए मिलने वाली स्प्रिंकलर पाइप के लिए ही भटक रहे हैं। आरोप है कि किसानों को सिंचाई के पाइप के लिए मिलने वाला अनुदान में ही खेल कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि फौव्वारा सिंचाई योजना में प्रति लाभार्थी को एक हेक्टेयर खेत पर 19 हजार रुपये का अनुदान दिए जाने का प्राविधान है। किसान से संतुष्टी प्रमाण पत्र के साथ सामान का बिल बाउचर लेने के बाद ही अनुदान की रकम दी जाती है। सूत्रों की मानें तो अफसरों ने मनमाने तरीके से लाभार्थियों का चयन किया है।
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आवेदन करने वाले कुछ ऐसे भी किसान हैं, जिन्हें आज तक स्प्रिंकलर सिंचाई का सामान अनुदान नहीं दिया गया है। मूरतगंज ब्लाक के एक किसान ने बताया कि आवेदन के बाद भी उसे अब तक स्प्रिंकलर पाइप आदि आज तक नहीं दिया गया है। इन किसानों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी और प्रमुख सचिव उद्यान से की है। मामले में जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह यादव का कहना है कि किसानों को फौव्वारा सिंचाई योजना के अनुदान की रकम दी जा चुकी है।

फौव्वारा सिंचाई योजना के आवेदकों को 30 पाइप, 05 स्प्रिंकलर, 01 कनेक्टर, 01 टी, 05 सर्विस पैडल, दो हैंडकैप अनुदान की रकम से दिए जाने का प्राविधान है। एक हेक्टेयर पर करीब 14 हजार रुपये की सब्सिडी विभाग द्वारा दी जाती है।

उद्यान विभाग की मौन पालन योजना में किए गए खेल की जांच को आए डिप्टी डायरेक्टर भूपेंद्र सिंह को विभाग के स्थानीय अफसर फौव्वारा सिंचाई में चयनित किए गए किसानों का गांव तक नहीं बता सके। वहीं जांच के दौरान दफ्तर में योजना के क्रियावन्यवन से संबंधित अभिलेख भी नहीं दिखाया गया। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी है।
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