बेतहाशा धुआं उगलते फर्राटा भरते वाहन और उनके चालक आम लोगों के लिए मुसीबत बढ़ाते ही जा रहे हैं। बाजारों में वाहनों के धुएं से जहां सांस लेना मुश्किल रहता है, वहीं चालकों की मनमानी से जाम लग जाता है। मगर डग्गामार वाहनों के चलते लगने वाले जाम और धुएं से परेशान लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है। परिवहन और यातायात पुलिस महकमे के जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अफसरों की इस बेफिक्री का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
कौशाम्बी को जनपद बने 18 साल का समय बीत चुका है। पर, अब भी यह जिला बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यहां परिवहन की है। डिपो का निर्माण नहीं होने के कारण डग्गामार वाहन ही यातायात के प्रमुख साधन हैं। ज्यादातर रूटों पर आवागमन के लिए प्राइवेट बसें ही सहारा हैं। वहीं एक बाजार से दूसरे बाजार के लिए टेंपो ही एकमात्र साधन हैं।
कौशाम्बी के सभी रूटों पर चलने वाले ज्यादातर डग्गामार वाहन खटारा हैं। ये ऐसे वाहन हैं, जिन्हें प्रदूषण फिटनेस की कमी के कारण बड़े शहरों से बाहर कर दिया गया है। शहरों में चलने के लिए प्रतिबंधित ये वाहन कौशाम्बी में बगैर किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे हैं।
मंझनपुर-इलाहाबाद, इलाहाबाद से पश्चिमशरीरा, सरायअकिल से इलाहाबाद, इलाहाबाद से करारी रूट पर चलने वाली प्राइवेट बसें हों अथवा मंझनपुर-सिराथू, भरवारी-मंझनपुर, सैनी, देवीगंज, कड़ा-सैनी, सैनी-अजुहा, मूरतगंज-सैनी, भरवारी, मूरतगंज, चायल-पुरामुफ्ती, सरायअकिल-पश्चिमशरीरा, मंझनपुर-पश्चिमशरीरा, करारी-मंझनपुर रूट पर चलने वाले तिपहिया वाहन। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं वातावरण को विषाक्त बना रहा है। पर, इन प्राइवेट वाहनों के प्रदूषण स्तर की कभी जांच नहीं की जाती है।
जबकि इन वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण कैंसर के अलावा सांस, लीवर आदि की खतरनाक बीमारियां पैदा हो रही हैं। मामले में एआरटीओ केडी सिंह का कहना है कि वाहन के प्रदूषण फिटनेस की जांच और कार्रवाई समय-समय पर होती रहती है।
जाम में फंसे टेंपो से निकलने वाले धुएं से सांस लेना दुश्वार हो जाता है। सिराथू, मूरतगंज, भरवारी, सरायअकिल जैसी व्यस्त बाजारों में दिनभर में जाम लगता ही रहता है। ऐसे में जाम के दौरान उसमें फंसे टेंपो से निकलने वाला धुआं सांस लेना दुश्वार कर देता है। ऐसा नहीं कि पुलिस वाले धुआं उगलते वाहन को नहीं देखते। पर पुलिस की सारी कार्रवाई वसूली तक ही सीमित रहती है। पुलिस वाले चालक से सवाल जवाब भी नहीं करते। ऐसे में धुआं उगलते वाहन फर्राटा भरते रहते हैं।
वातावरण को विषाक्त बनाने वाले डग्गामार वाहन कौशाम्बी की बाजारों में लगने वाले जाम के लिए भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। मंझनपुर, सिराथू, देवीगंज, कड़ा, भरवारी, मूरतगंज, करारी, सरायअकिल समेत सभी बाजारों में प्राइवेट बस और टेंपो चालक चौराहे अथवा मुख्य बाजार के समीप वाहनों को खड़ा करके सवारियों का इंतजार करते हैं। वाहनों के आधी सड़क तक आड़े-तिरछा खड़े होने के कारण बाजारों में जाम की समस्या खड़ी हो जाती है। इसे लेकर कई बार अन्य वाहन चालकों की इनसे लड़ाई भी होती रहती है।
डग्गामार वाहनों से लगने वाले जाम की समस्या तो जनपद की सभी बाजारों में नासूर सी हो गई है। इससे पुलिस और यातायात महकमे के अफसर भी वाकिफ हैं। इसके बाद भी प्राइवेट वाहनों का निर्धारित स्थानों से संचालन नहीं कराया जा रहा है। मंझनपुर के राकेश केसरवानी, बबलू शुक्ल, शिवकुमार पाल, रामबाबू, गयादीन साहू, शिवकुमार, सुखलाल आदि ने बताया कि मंझनपुर चौराहे से बाजार को जाने वाली सड़क पर अक्सर टेंपो के खडे़ होने से जाम जैसे हालात बने रहते हैं। शनिवार की शाम तो इससे करीब घंटेभर तक जाम भी लगा रहा। मामले में सीओ सिटी रमाकांत यादव से बात की गई, तो उन्होंने कहाकि जल्द ही इसके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।