सरायअकिल के बसुहार कटैनी गांव में निर्माणाधीन बिजली उपकेंद्र के लिए अधिगृहीत जमीन को लेकर बवाल मचा हुआ है। चिह्नित जमीन को अपनी बताते हुए गांव वालों ने दो महीने से निर्माण कार्य रोक रखा है। निर्माण एजेंसी और बिजली विभाग के एसडीओ की शिकायत पर रविवार को फोर्स लेकर एसडीएम काम शुरू करवाने पहुंचे, लेकिन गांववालों जमीन छोड़ने को राजी नहीं हुए। ग्रामीण ने कोर्ट का स्टे आर्डर दिखाकर अफसर को बैरंग लौटने पर मजबूर कर दिया। एसडीएम ने बताया कि जमीन का मामला अदालत में विचाराधीन है। कोर्ट का आदेश आने के बाद ही इस मसले पर कुछ किया जा सकता है।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने विजन-2016 के तहत कौशाम्बी के बसुहार कटैनी गांव में 33 केवीए विद्युत उपकेंद्र निर्माण कराया जा रहा है। यमुना तराई के 25 गांवों को बिजली सप्लाई के लिए करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस उपकेंद्र के लिए तहसील प्रशासन ने ग्रामसभा की खाली पड़ी जमीन में से 1 बीघा 5 बिस्वा जमीन बिजली विभाग को अधिग्रहीत कर दी थी। जमीन का सीमांकन हो जाने पर बिजली विभाग ने विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कार्य शुरू कराया। पर, निर्माण शुरू होते ही गांव के रामबली, राम अवतार, गया प्रसाद आदि ग्रामीण इस जमीन को अपनी बताते हुए निर्माण कार्य का विरोध करने लगे।
एकजुट हुए ग्रामीणों के तेवर देखते हुए निर्माण एजेंसी को काम बंद कराना पड़ा। करीब दो महीने से उपकेंद्र निर्माण का कार्य ठप है। तमाम प्रयास के बाद भी ग्रामीण अधिग्रहीत जमीन छोड़ने को राजी नहीं है। इस मामले की शनिवार को एसडीओ विद्युत सतीश वर्मा ने अफसरों से शिकायत की। इस पर रविवार को एसडीएम चायल, तहसीलदार कई थानों की फोर्स लेकर पहुंचे और निर्माणकार्य शुरू कराया, तो गांववाले जुटकर विरोध करने लगे। घंटों इसे लेकर निर्माणस्थल पर हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान गांववालों ने एसडीएम चायल को अदालत का स्टे आर्डर दिया। स्टे आर्डर देखकर एसडीएम बैरंग लौट गए। मामले में एसडीएम अश्विनी कुमार ने बताया कि अदालत से जमीन का स्थगनादेश है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे कोई कार्रवाई संभव है।