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अतिक्रमण का शिकार हुई उदहिन माइनर

Mon, 30 Nov 2015 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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तालाब, ग्रामसभा की जमीन ही नहीं कौशाम्बी में नहरें और माइनरें भी अतिक्रमण की शिकार हैं। मंझनपुर कस्बे के समीप उदहिन माइनर पर तो आसपास के लोगों ने कब्जा कर रखा है। मिट्टी से पाटकर लोगों ने आने-जाने का रास्ता बना लिया है। यही कारण है कि बरसों से इस नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। आरोप है कि समस्या से अवगत कराने के बावजूद विभाग समाधान नहीं कर रहा है।
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कौशाम्बी के सिराथू, पइंसा, मंझनपुर, समदा आदि इलाके के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए उदहिन माइनर बनाई गई है। इसमें किशुनपुर पंप कैनाल से पानी उपलब्ध कराया जाता है। पर, कई साल साल से इस माइनर में पानी नहीं छोड़ा गया है। इसके कारण यह सूखी पड़ी है। माइनर को पाटकर आसपास के लोगों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। मंझनपुर से समदा के बीच तो पटरी किनारे बने बसे लोगों ने मिट्टी से माइनर को पाटकर रास्ता बना लिया है। इसके कारण नहर में पानी छोड़ा जाना भी मुश्किल हो गया है।

 उधर, माइनर को पाटे जाने की शिकायत कई बार स्थानीय किसानों ने नहर विभाग के अफसर और अन्य अधिकारियों से किया। इसके बाद भी नहर को अतिक्रमणमुक्त कराकर उसकी सफाई और टेल तक पानी उपलब्ध कराने की ओर गंभीरता नहीं दिखाई गई। वहीं देखें तो बारिश नहीं हने के कारण शासन ने कौशाम्बी को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इसी के साथ खराब नलकूपों को दुरूस्त कराने, नहरों की सफाई कराकर टेल तक पानी उपलब्ध कराने का भी फरमान है। मगरोहनी गांव के बुधराम धोबी, दयाशंकर विश्वकर्मा, चिन्टू चौरसिया, देवमनि पाल, अवधेश विश्वकर्मा, कल्लू पाल आदि किसानों ने बताया कि पानी नहीं छोड़े जाने से उनके खेत बंजर बने हुए हैं।
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