सैनी फायर स्टेशन के ठीक बगल स्थित मकान में शुक्रवार रात एक वृद्धा की मौत हो गई। सुबह कमरे में उसकी लगभग जल चुकी लाश मिली। घटना को लेकर आश्चर्य यह रहा कि मकान के ऊपरी मंजिल में मौजूद उसके बहू, बेटे और बगल स्थित फायर स्टेशन के कर्मियों को रात में इस घटना की भनक तक नहीं लगी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर घटना की जांच शुरू कर दी है। कस्बे में इस वारदात को लेकर दिन भर चर्चाओं का बाजार गरम रहा।
सैनी कस्बे में हाईवे के बगल सिराथू रोड पर फायर स्टेशन स्थित है। इससे सटा हुआ ओम प्रकाश सोनी का दो मंजिला मकान है। बृहस्पतिवार को ओम प्रकाश अपनी दो बेटियों के साथ फतेहपुर में आयोजित एक वैवाहिक समारोह में शामिल होने गए थे। घर में उसकी पत्नी प्रभावती उर्फ अमरावती देवी (65) और बहू-बेटे थे। शुक्रवार सुबह घर के भीतर प्रभावती की जली हुई लाश पड़ी थी। मकान की ऊपरी मंजिल पर सो रहे बहू-बेटे सुबह करीब 6 बजे जागने के बाद नीचे उतरे तो प्रभावती की जलकर कोयला हो चुकी लाश देख उनके होश उड़ गए।
बहू-बेटे की चीखें सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शव के नाम पर जलने से बची हुई हड्डियां ही थीं। यह मंजर देख लोगों की रूह कांप गई। वहीं सबसे ज्यादा लोग इस बात से चकित थे कि रात में वृद्धा की जलने से मौत हो गई। इस दौरान लपटों की चपेट में आने से वह चीखी-चिल्लाई होगी। कपड़े और शरीर जलने की गंध, धुआं आदि से भी घर में सो रहे बहू, बेटे को घटना की भनक कैसे नहीं लगी? वृद्धा कैसे जली? इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं।
घटनास्थल पर मिट्टी के तेल का एक डिब्बा भी पड़ा मिला। परिजनों की मानें तो वृद्धा की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। ऐसे में उसने खुद ही मिट्टी का तेल उड़ेलकर खुदकुशी की है। हालांकि घरवालों का यह तर्क लोगों के गले नहीं उतर रहा है। लोगों में कानाफूसी है कि वृद्धा ने यदि आत्महत्या के लिए खुद को आग के हवाले किया था तो आग लगने के बाद वह जान बचाने के लिए चीखी जरूर होगी अथवा लपटों से घिरने के बाद भी उसने शोर क्यों नहीं मचाया? मामले में सैनी कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार का कहना है कि घटना की बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तफ्तीश के बाद ही सच्चाई का पता चलेगा।