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कछार के 50 स्कूलों में प्यासे पढ़ते हैं नौनिहाल

Tue, 17 Nov 2015 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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बारा (कौशाम्बी)। यमुना कछार में बसे कौशाम्बी ब्लाक के 50 से ज्यादा स्कूलों में पानी का ही इंतजाम नहीं है। इससे जहां छात्र-छात्राओं को प्यासा रहकर ही पढ़ने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। वहीं दोपहर का भोजन करने के बाद बच्चे जूठा हाथ और बर्तन लेकर बस्ती की ओर दौड़ लगाने को मजबूर हैं।
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 पानी की यह समस्या अध्यापकों और रसोइया को भी भुगतनी पड़ रही है। रसोइया को तो खाना बनाने के लिए गांव के हैंडपंपों से पानी भरकर लाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर, प्रधानाध्यापक और प्रधानों की मानें तो कई बार सूची बनाकर भेजने के बाद भी जलनिगम विभाग हैंडपंपों को दुरुस्त नहीं करा रहा है।
जनपद के कौशाम्बी ब्लाक की 57 ग्रामसभा के लड़के-लड़कियों को बुनियादी शिक्षा मिले। इसके लिए क्षेत्र में 213 प्राथमिक और 75 पूर्व माध्यमिक स्कूल खोले गए हैं।
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 बेसिक शिक्षा विभाग के इन स्कूलों में अहमतिया, बारा, कोरांव, नौहाई, सड़वा आदि 50 से अधिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां पीने के पानी का ही इंतजाम नहीं है। खंड शिक्षा अधिकारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि ब्लाक के दर्जनभर स्कूलों में तो हैंडपंप ही नहीं लगाए जा सके हैं। जबकि हैंडपंपों की स्थापना के लिए जलनिगम विभाग को कई बार लिखापढ़ी की जा चुकी है। इसी तरह से 17 स्कूलों के हैंडपंप करीब साल भर से खराब पड़े हैं। वहीं 11 विद्यालय के नलों से गंदा पानी निकलता है। 50 से अधिक स्कूलों में पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ ही हजारों विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा समस्या तो छात्र-छात्राओं को दोपहर का भोजन में होती है। मध्याह्न भोजन के बाद बच्चे जूठे हाथ और बर्तन लेकर घरों की ओर दौड़ लगाने को मजबूर हैं। वहीं स्कूलों में एमडीएम बनाने के लिए भी रसोईया को बस्ती में लगे हैंडपंप से बाल्टी अथवा डिब्बे में पानी भरकर लाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

प्राथमिक स्कूल अहमतिया के प्रधानाध्यापक अमरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मार्च 2013 से उनके स्कूल का हैंडपंप खराब है। कई बार एबीएसए, बीएसए और ग्राम प्रधान को लिखापढ़ी की गई, लेकिन हैंडपंप रिबोर नहीं कराया जा सका। वहीं प्राथमिक स्कूल बारा का भी हैंडपंप करीब साल भर से खराब पड़ा है। मामले में प्रधान पीतांबर सरोज का कहना है कि उन्होंने गांव में खराब पड़े हैंडपंपों के साथ स्कूल के नल की भी सूची बनाकर ब्लाक और जलनिगम को भेजी है। कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है।
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