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बर्फीली हवाओं से दोआबा में ठंडक शुरू

Thu, 29 Oct 2015 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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कौशाम्बी के आसमानों में बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी काले बादलों का डेरा जमा रहा। रुक-रुककर दिन भर बूंदाबांदी भी होती रही। बारिश के साथ चल रही बर्फीली हवाओं के कारण ठंड ने भी दस्तक दे दी है। सुबह तो तेज बर्फीली हवाओं के कारण कंपकंपी सी महसूस होती रही। इस ठंड से बचने के लिए गांव के लोगों को तो आग का सहारा भी लेना पड़ा। हवा, बारिश से साथ हुई सर्दी की दस्तक से लोगों के हल्के गरम कपड़े भी निकल आए हैं। वहीं बारिश से अन्नदाता गदगद हैं। रबी की बुआई के लिए परेशान किसान इस बूंदाबांदी के बाद आलू, गेहूं समेत अन्य फसलों की बुआई शुरू कर देंगे।
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कार्तिक का महीना शुरू होते ही बुधवार को अचानक  मौसम बदल गया। देखते ही देखते आसमान पर बादलों ने डेरा जमा लिया। तेज बर्फीली हवाओं के साथ आकर आसमान में जमे बादल बुधवार को दिनभर बरसते रहे। बारिश का सिलसिला दूसरे दिनभर जारी रहा। सारा दिन रूक-रूककर बारिश होती रही। बरसात के साथ ही तेज बर्फीली हवाएं भी चल रही हैं। इससे दिन और रात के तापमान में भी गिरावट आई है। महगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश और बर्फीली हवाओं के कारण इसमें 7 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है।

बृहस्पतिवार को दिन का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहा। रात के भी तापमान में गिरावट हुई है। तेज ठंडी हवाओं के कारण सुबह तो कंपकंपी से महसूस होती रही। इसके कारण गांवों में कई स्थानों पर लोग अलाव भी तापते नजर आए। इसके अलावा ठंडक की दस्तक के कारण लोगों ने कंबल, गर्म कपड़े भी बाहर निकाल लिया है। यही नहीं कई लोग तो हाफ स्वेटर आदि पहने भी दिखे। उधर, बुधवार से लगातार हो रही बूंदाबांदी से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। बता दें कि मानसून के समय में कम बारिश के कारण पूरा जिला सूखे की चपेट में रहा।
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 खेतों में बिल्कुल नमी नहीं होने के कारण लोग आलू, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि की बुआई नहीं कर पा रहे थे। पलेवा करके बुआई करने पर भी जमाव ठीक से नहीं हो रहा था। इस बारिश के बाद अब रबी फसल की बुआई में तेजी आ जाएगी। वहीं किसान गेहूं की बुआई के लिए भी खेत तैयार कर लेंगे। कृषि जानकारों का मानना है कि अक्तूबर महीने में हुई इस बारिश से सूखकर बर्बाद हो रही दलहन (अरहर) की फसलों को सबसे ज्यादा फायदा है। हालांकि इस बरसात ने धान के कुछ किसानों को नुकसान भी पहुंचाया है।
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