कौशाम्बी के सैनी इलाके में सोमवार को आसमान से भारी-भरकम गुब्बारे के सहारे सेना के जवानों को उतरते देख क्षेत्र में सनसनी मच गई। लोग अनहोनी की आशंका से सहम गए। हालांकि सेना के ये जवान जबलपुर से लखनऊ जा रहे थे। रास्ते में गुब्बारे की गैस खत्म होने से उन्हें यहां मजबूरी में उतरना पड़ा था। बाद में ये जवान गुब्बारे समेत ट्रक में सवार होकर चले गए। वहीं बैलून और उस पर सवार सेना के जवानाें को देखने के लिए मौके पर भीड़ जुट गई।
लखनऊ में हाट एयर बैलून आर्मी की 75वीं सालगिरह पर समारोह का आयोजन किया गया है। 27 अक्तूबर को होने वाले इस समारोह में भाग लेने के लिए जबलपुर से दो हाट बैलून पर सवार होकर सेना के 6 जवान लखनऊ के लिए निकले थे। 25 अक्तूबर को इलाहाबाद में रुकने के बाद सोमवार की सुबह ये जवान लखनऊ के लिए आकाश मार्ग से रवाना हुए। हालांकि जैसे ही हवा में तैरते हुए सेना के इन जवानों के गुब्बारे कौशाम्बी के सैनी इलाके में पहुंचे अचानक इनके बैलून की गैस खत्म होने लगी। इस पर जवानों ने पहला बैलून चकिया गुलामीपुर स्थित बेनी प्रसाद साहू के खेत में और दूसरा बैलून लोधन का पुरवा (धुमाई) गांव निवासी शिवसागर लोध के खेत में उतार लिया।
सुबह करीब नौ बजे कुछ देर के अंतराल में खेतों में भारी-भरकम बैलून से सेना के तीन-तीन जवानों को उतरते देख ग्रामीण सशंकित हो गए। कुछ देर तक तो ग्रामीणों की समझ में ही कुछ नहीं आया। पूरे गांव में बैलून से सेना के जवानों के उतरने को लेकर कानाफूसी शुरू हो गई। हालांकि बाद में गांव के एक-एक करके लोग वहां जुटने लगे। देखते ही देखते बैलून और जवानों को देखने के लिए भीड़ जुट गई। उधर, खेत में उतरने के बाद इन जवानों की सूचना पर सेना के अन्य जवान, जो इनकी सहायता के लिए ट्रक लेकर सड़क मार्ग से चल रहे थे, पहुंच गए। सेना के जवानों ने बताया कि बैलून की गैस अचानक खत्म होने लगी थी। इसलिए उन्हें आपातस्थिति में इनको खेतों में उतारना पड़ा। इन जवानों के साथ रहे कर्नल करन सिंह ने बताया कि वे लोग लखनऊ में होने वाले समारोह में हिस्सा लेने जा रहे हैं। जबलपुर से सेना के ये जवान बैलून से कौशाम्बी तक आए थे।