द्वाबा में संक्रामक बीमारियों का कहर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। डायरिया, डेंगू के बाद अब बुखार से भी लोगों की जान जाने लगी है। बुधवार की रात ही चायल कस्बे की एक मासूम बच्ची की मौत बुखार के कारण हो गई। सात दिनों से बुखार से तप रही इस बालिका का इलाज घरवाले स्थानीय एक झोलाछाप चिकित्सक से करा रहे थे।
चायल कस्बे की रहने वाली सलोनी देवी (12) पुत्री मुसई लाल को शनिवार से बीमार थी। शाम तेज बुखार आने पर परिजनों ने स्थानीय एक चिकित्सक को दिखाकर दवा ले ली थी। परिजन बताते हैं कि बुधवार की रात अचानक उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई।
इससे घबराए घरवाले उसे लेकर फिर से उसी झोलाछाप चिकित्सक के पास गए। उक्त चिकित्सक ने हालत नाजुक देख बालिका को इलाहाबाद रेफर कर दिया। परिजनों ने उसे इलाहाबाद के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया। जहां बुधवार की देर रात उसकी सांसें थम गई। परिजनों के साथ गांव के लोगों का कयास है कि बच्ची की मौत डेंगू अथवा दिमागी बुखार के कारण हुई है। वहीं बालिका की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बता दें कि पखवारेभर से द्वाबा में डेंगू, डायरिया के साथ बुखार कर कहर जारी है।
बुखार की चपेट में आने के बाद लोग काल के गाल में समा रहे है। सरायअकिल के बहुगरा गांव की प्रियंका (15) पुत्री अखिलेश और रेही गांव के डिक्कन (50) के अलावा कई अन्य लोगों की बुखार की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। मामले में सीएमओ डा. यूबी सिंह का कहना है कि बुखार आने पर इलाज में लापरवाही बरतने के कारण मौतें हो रही हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने सभी लोगों से झोलाछाप डाक्टरों के बजाय नजदीकी शासकीय अस्पतालों में उपचार कराने की सलाह दी है।