शैक्षिक अभिलेखों के साथ बधिर का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हथियाना मेडुआ सलेमपुर गांव के युवक को महंगा पड़ा। गुरूजी अपने ही बनाए चक्रव्यूह में फंस गए। अभिलेखों की जांच पड़ताल करने के बाद बर्खास्त करते हुए शनिवार को बीएसए ने फर्जी गुरूजी के खिलाफ सरायअकिल थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र के मेडुआ सलेमपुर गांव निवासी राकेश सिंह ने बीटीसी 2010 में फर्जी दस्तावेज लगाकर दाखिला लिया था। नामांकन में बीएससी मथुरा और तैनाती में बीए मैनपुर की फर्जी मार्कशीट लगाई थी।
इसके अलावा युवक ने श्रवण बधिर होने का भी फर्जी प्रमाण पत्र चित्रकूट से बनवाकर लगाया था। बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वर्ष 2014 में उसकी तैनाती कौशाम्बी ब्लाक के बेरौंचा प्राथमिक स्कूल प्रथम की गई थी। इन दिनों गुरूजी इसी स्कूल में बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दे रहे थे। गांव के हिरेन्द्र सिंह ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अभिलेखों का सत्यापन कराया तो शैक्षिक अभिलेख फर्जी मिले। जांच पड़ताल के बाद खुद के चक्रव्यूह में फंसे गुरूजी को बेसिक शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार यादव ने बर्खास्त कर दिया। शुक्रवार को बीएसए की तहरीर पर सरायअकिल पुलिस ने फर्जी गुरूजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। विभाग की इस कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मचा है।
दोआबा के परिषदीय स्कूलों में फर्जी डिग्री वाले गुरूजी की लंबी फेहरिस्त है। एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। एक साल पहले डायट में बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे दो दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों के अभिलेख फर्जी मिले थे। शैक्षिक अभिलेखों की जांच पड़ताल के बाद उन्हें निकाल दिया गया था। इसके बाद भी माफिया विभागीय अफसरों और कर्मियों से सांठगांठ कर लोगों को नौकरी दिला रहे हैं।