तकरीबन साढ़े सात बजे अचानक मिट्टी का टीला ढह गया। इससे सभी नौ लोग मलवे में दब गए। चीखपुकार सुन जुटे पड़ोसी ग्रामीणों ने आननफानन मलवा हटाकर सभी को बाहर निकाला। इसी बीच कोखराज कोतवाल चंद्रभूषण मौर्या और एसडीएम सिराथू योगेश कुमार गौड़ भी मौके पर पहुंच गए। दो एंबुलेंस की मदद से सभी को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। अस्पताल में चेकअप के बाद डॉक्टरों ने ममता देवी उसकी देवरानी लालती देवी,वृद्धा कछरही देवी, खुशी, सुमन उर्फ उमा समेत पांच को मृत घोषित कर दिया।
वहीं, सपना देवी, मैना देवी, सुग्गन उर्फ आक्रोश, लखनी देवी पत्नी स्व. लखन समेत चारों घायलों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। जानकारी मिलते ही डीएम मधुसूदन हुल्गी ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज करने का निर्देश दिया। हादसे के बाद से पीड़ित परिवार की रो-रो कर हालत खराब है।
मिट्टी की खुदाई करते समय टीला ढहने से पांच महिलाओं की मौत हो गई। वहीं, चार घायलों का मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर इलाज कराया जा रहा है। मृख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। घायलों को बेहतर इलाज के साथ ही राहत राशि मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं। - मधुसदून हुल्गी-डीएम
टीकरडीह से लेकर अस्पताल और मोर्चरी तक करुण क्रंदन
टीकरडीह में मिट्टी का टीला ढहने से हुई पांच मौतों के बाद गांव से लेकर मेडिकल कॉलेज और पीएम हाउस तक चीख-पुकार मची रही। बिलखते परिजनों, खून से सने शवों को जिसने देखा, वह दहल गया। हादसे ने पल भर में हंसते-खेलते चार परिवारों को उजाड़ दिया। घटना के बाद सभी को फौरन मेडिकल कॉलेज लाया गया। परिजनाें के साथ ही तमाम ग्रामीण भी अस्पताल पहुंच गए। यहां जैसे ही डॉक्टरों ने पांच मौतों की पुष्टि की। मौजूद परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे।
सदर कोतवाल संजय तिवारी ने मृतकों को एंबलुेंस से पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया। मृतकों के परिजन भी एक-एक कर मोर्चरी आ रहे थे। जैसे ही वह अपनों से मिलते और निगाहें शव की ओर जाती तो चीत्कार से पसरा सन्नाटा एकाएक टूट जाता। मृतका ममता और लालती के मायके वाले भी पोस्टमार्टम हाउस आ गए थे। सभी एक-दूसरे को गले लगाकर रो रहे थे। यही हाल खुशी और उमा के परिवार था।
वृद्ध कछरही के परिजनों पर तो दुखों का पहाड़ टूटा था। घर के तीन लोग हादसे का शिकार हुए थे। कछरही की मौत के साथ ही बेटा सुग्गन और बहू मैना अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं। गांव में भी मातम छाया है। पीड़ित परिवारों के घर पूरे दिन एक-एक कर रिश्तेदारों के आने का सिलसिला बना रहा है। किसी एक भी आने पर महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगती थीं।
घर संवारने के सपने लेकर गई थीं, उजड़ गया परिवार
सुबह करीब छह बजे महिलाएं, बेटियां जब अपने-अपने घरों से निकलीं थीं, तो उनकी आंखों में एक सुंदर सपना था कि उन्हें घर की पोताई कर संवारना है। मगर, उन्हें क्या पता था कि, उनका यह सपना अधूरा ही रह जाएगा और उनका परिवार ही उजड़ जाएगा। टीकरडीह गांव में सोमवार सुबह हुए हादसे में पांच मौतों के बाद मंजर ही बदल गया। परिजनों की कारुणिक चीख-पुकार से लोग सहम गए।
हादसे की शिकार ममता और ललिता सगी देवरानी-जेठानी हैं। दोनों के पति ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। दोनों बच्चों को घर पर छोड़कर कुछ देर में लौटकर आने की बात कहकर निकली थीं। घर पर बच्चे मां के आने का इंतजार कर रहे थे , लेकिन वे नहीं, उनकी मौत की खबर पहुंची।
मृतका कछरही भी अपने बड़े बेटे सुग्गन और छोटी बहू मैना देवी के साथ मिट्टी खोदने तालाब गई थी। कछरही की मौत व बहू-बेटे के जख्मी होने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मौत का शिकार छात्रा खुशी ने हाईस्कूल और सुमन उर्फ उमा ने इसी साल इंटर की परीक्षा पास की थी। दोनों छात्राएं आगे के पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। किसी को क्या पता कि इस तरह से अचानक मौत उन पर झपट्टा मार देगी। सभी अपने-अपने घर की पुताई के लिए तालाब से मिट्टी खोदने गईं थीं। उन्हें क्या पता था कि घर सुंदर बनाने के चक्कर में उनका परिवार ही उजड़ जाएगा।
मिट्टी निकालने आते हैं लोग
ग्रामीणों के मुताबिक, इस इलाके की सफेद मिट्टी कच्चे घरों में पुताई के बाद चूना की तरह चमक देती है। गांव समेत आसपास के ग्रामीण यहां मिट्टी निकालने आते हैं। अधिक मिट्टी निकालने के दौरान अक्सर ग्रामीण काफी अंदर तक घुस जाते हैं। शायद अत्याधिक मिट्टी खनन हादसे की वजह बन गया।