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UP Election Result : सत्ता की छांव में मुरझा गया कौशाम्बी का कमल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद का है गृह जनपद

Tue, 04 Jun 2024 06:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गृह जनपद कौशाम्बी में भाजपा की बहुत बुरी दुर्गति हुई है। भाजपा से दो बार से सांसद निर्वाचित हो रहे विनोद सोनकर को इस बार हार का मुंह देखना पड़ा। सपा महासचिव इंद्रजीत सरोज के बेटे व सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज ने उन्हें एक लाख से अधिक मतों से पराजित कर दिया। कौशाम्बी की तीनों विधानसभा सीटों पर भी सपा का कब्जा है। कुंडा विधायक राजाभैया से तनातनी भी विनोद को भारी पड़ी। 
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पराजय के बाद मतगणना केंद्र से बाहर जाते प्रतापगढ़ भाजपा प्रत्याशी संगमलाल व कौशाम्बी के विनोद सोनकर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सूबे के डिप्टी सीएम का गृहजनपद कौशाम्बी। यहां की जिला पंचायत पर भाजपा की सत्ता। दो नगर पालिका परिषद समेत चार निकायों में भी कमल का राज। इसके अलावा नगर से लेकर जिला पंचायत के तमाम वार्डों में भी भगवा लहरा रहा है। फिर भी इस संसदीय सीट पर कमल का फूल मुरझा गया। भाजपा ने इस लोकसभा चुनाव में लगातार दो बार के सांसद विनोद सोनकर को मैदान में उतारा था। जबकि, सपा ने पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को टिकट दिया था।

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केंद्र व प्रदेश दोनों में भाजपा की सरकार है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जनपद के ही सिराथू क्षेत्र के रहने वाले हैं। केंद्र की राजनीति में भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर की मजबूत पैठ भी किसी ने छिपी नहीं है। जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना सरोज भी भाजपा की है। चार जिला पंचायत सदस्य जो हैं वह अलग। पिछले साल हुए 10 नगर निकायों के चुनाव में से चार पर भाजपा ने जीत दर्ज की।

कमल के निशान पर चुनाव लड़कर नगर पालिका परिषद मंझनपुर में वीरेंद्र फौजी, भरवारी में कविता पासी, नगर पंचायत सिराथू में भोला यादव और अजुहा में शांती कुशवाहा अध्यक्ष बनीं। नगर पालिका परिषद मंझनपुर में नौ वार्डों में भाजपा के सभासद हैं। इसी तरह आठ में से पांच ब्लॉक प्रमुख भी भाजपाई हैं। लोकसभा के इस चुनाव में भाजपा से जुड़े इन सभी जनप्रतिनिधियों ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। बावजूद इसके पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों को लाने में नाकाम रहे।

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विरासत की सियासत का पुष्पेंद्र को मिला फायदा

लंदन के क्वीन यूनिवर्सिटी से एकाउंटेंसी से स्नातक की डिग्री हासिल कर सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंचने वाले सपा प्रत्याशी पुष्पेंद्र सरोज की व्यक्तिगत तौर पर कोई राजनीतिक पकड़ नहीं है, लेकिन सियासत उन्हें विरासत में मिली है। लोकसभा चुनाव में उन्हें इसका भरपूर फायदा मिला।

एक मार्च 1999 को जन्मे पुष्पेंद्र ने तीन महीने पहले ही उम्र की 25वीं दहलीज पार की है। हालांकि, पुष्पेंद्र को सियासत विरासत में देने वाले पिता इंद्रजीत सरोज ने 90 के दशक में बसपा से राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी। पहली दफा वर्ष 1997 में वह मंझनपुर विधानसभा से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह 2002, 2007 और 2012 में लगातार चार चार बसपा से ही विधायक निर्वाचित हुए। तत्कालीन मायावती सरकार के किचेन कैबिनेट में शामिल इंद्रजीत सरोज दो बार सूबे के कबीना मंत्री भी रह चुके हैं।

2018 में हाथी से उतरकर साइकिल की सवारी करने वाले इंद्रजीत को अनुसूचित जाति का बड़ा चेहरा मानते हुए सपा ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ ही वर्ष 2019 में कौशाम्बी लोकसभा से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, मोदी लहर में वह भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में इंद्रजीत ने खुद को साबित करते हुए कौशाम्बी जिले भाजपा को क्लीन स्वीप कर दिया था।

पांचवीं बार मंझनपुर विधानसभा क्षेत्र से ही सपा के टिकट पर विधायक चुने गए इंद्रजीत वर्तमान में सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि नव निर्वाचित सांसद पुष्पेंद्र को चुनाव में पिता की इसी सियासी विरासत का फायदा मिला है।
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