अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। विधि दिवस के मौके पर बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें प्रभारी जनपद न्यायाधीश राज नारायण पांडेय ने अधिवक्ताओं से अपनी भूमिका को संपूर्णता के साथ निवर्हन करने का आह्वान किया। कहा कि अधिवक्ताओं के ही माध्यम से ही जन-जन को न्याय दिलाना संभव है। इस दौरान अधिवक्ताओं ने भी न्याय से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया।
बता दें कि 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को स्वीकार किया गया था। तभी से यह दिन विधि दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर बुधवार को जनपद न्यायालय सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मौजूद प्रभारी जनपद न्यायाधीश राज नारायण पांडेय ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल एवं पवित्र भावना है कि प्रत्येक व्यक्ति को न्याय मिले। इसकी परिकल्पना बगैर अधिवक्ता के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अपनी भूमिका को पूरी गंभीरता से निभाएंगे, तो जन-जन को न्याय मिलने में तनिक भी दिक्कत नहीं होगी। अपर जिला जज रामकिशोर शुक्ल ने न्याय प्रशासन को इस प्रकार कार्य करना होगा, जिससे आमजन को सस्ता और सुलह न्याय प्राप्त हो सके। इसमें न्यायिक अफसरों के साथ ही अधिवक्ताओं की भूमिका भी अहम है। वहीं अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रेमनाथ शुक्ला ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को तभी न्याय मिल सकेगा, जब उनमें जागरूकता होगी। उन्होंने जागरूकता के लिए कार्यक्रमों के आयोजन और उसके प्रचार-प्रसार पर बल दिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और सिविल जज सीनियर डिवीजन सुरजन सिंह ने सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने छह दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में भी सभी वादकारियों से शामिल होने का आह्वान किया। इस मौके पर प्रधान न्यायाधीश परिवार कल्याण परमानंद शुक्ला, अपर जिला जज संजय कुमार मलिक, जिला सूचना अधिकारी जेएन यादव, उपेंद्र शुक्ला, रामहर्ष, नरेंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।