जंक फूड, मोबाइल फोन, टीवी की लत, असंतुलित खानपान और रसायनों के बढ़ते उपयोग इन दिनों बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी (समय से पहले यौवन) के लक्षण दिखाई देने की प्रमुख कारणों में से हैं। चिकित्सकों के अनुसार यह स्थिति सामान्य नहीं है और समय रहते ध्यान न दिया गया तो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजीव सिंह के मुताबिक लड़कियों में नौ वर्ष से पहले और लड़कों में 10 वर्ष से पहले यौवन से जुड़े बदलाव दिखना असमय यौवनारंभ की श्रेणी में आता है। ऐसे बच्चों में कद रुकने, मानसिक दबाव बढ़ने, व्यवहार में बदलाव और आगे चलकर हार्मोन संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि जंक फूड, पैक्ड और अधिक शुगर-फैट युक्त भोजन से मोटापा बढ़ रहा है, जिससे हार्मोन जल्दी सक्रिय हो रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म भोजन, कीटनाशक युक्त फल-सब्जियां, मोबाइल और टीवी की अधिक लत भी बच्चों के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ रही है। शारीरिक गतिविधि की कमी और नींद पूरी न होना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। चिकित्सा अधिकारी ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को संतुलित व ताजा भोजन दें, खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करें।